खुशखबरी! 1 मई से देश का सबसे बड़ा बैंक SBI करेगा लोन सस्ता, इनको मिलेगा फायदा

एसबीआई ने ऐलान किया है कि 1 लाख से ऊपर के कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट पर 0.25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की जाएगी.
खुशखबरी! 1 मई से देश का सबसे बड़ा बैंक SBI करेगा लोन सस्ता, इनको मिलेगा फायदा

1 मई एसबीआई कर्ज दरों में कटौती करेगा. (फोटो: SBI)

आरबीआई ने अपनी क्रेडिट पॉलिसी में रेपो रेट को 0.25 फीसदी घटाकर 6.00 फीसदी कर दिया है. अब इंतजार है कि रेपो रेट में हुई कटौती का फायदा बैंक आपको देंगे या नहीं. लेकिन, देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने लोन घटाने का रास्ता साफ कर दिया है. 1 मई एसबीआई कर्ज दरों में कटौती करेगा. 1 मई से 1 लाख रुपए से ज्यादा के कर्ज सस्ते हो जाएंगे. वहीं, डिपॉजिट दरों में भी कटौती की जाएगी. एसबीआई ने ऐलान किया है कि 1 लाख से ऊपर के कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट पर 0.25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की जाएगी. नए दरें 8.25 फीसदी होंगी.

एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंडिग पर आधारित लेंडिंग रेट्स (MCLR) में 8-10 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की जा सकती है. हालांकि, यह लोन की अवधि पर निर्भर करेगा.

एक्सटर्नल बेंचमार्क का मिलेगा फायदा
एसबीआई ने एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ने की वजह दरें कम होंगी. साथ ही ग्राहकों को अपने घटी दरों का फायदा मिलेगा. एक्सटर्नल बेंचमार्किंग नियम के तहत एक्सटर्नल बेंचमार्किंग नियम के तहत एसबीआई ने सबसे पहले यह पहल की है.

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किसे मिलेगा घटी दरों का फायदा
एसबीआई के मुताबिक, आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों में बदलाव का फायदा ग्राहकों को तुरंत देने के उद्देश्य से सेविंग डिपॉजिट और कम अवधि के कर्ज की ब्याज दर को रेपो रेट से जोड़ने का फैसला एक मई 2019 से लागू होगा. हालांकि, इससे एसबीआई के सभी ग्राहकों को फायदा नहीं होगा. नया नियम सिर्फ उन्हीं खातों पर लागू होगा, जिनमें 1 लाख रुपए से अधिक राशि होगी.

सेविंग डिपॉजिट की दरों में भी कटौती
एसबीआई अपने सेविंग डिपॉजिट की दरों में भी कटौती करेगा. बैंक के मुताबिक, 1 लाख से ऊपर के डिपॉजिट पर 0.25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की जाएगी. नई दरें, 3.25 फीसदी होगी. यह दर भी 1 मई से ही लागू की जाएगी.

क्या है एक्सटर्नल बेंचमार्किंग
एक्सटर्नल बेंचमार्किंग नियम के तहत लोन्स में फ्लोटिंग ब्याज दरें रेपो रेट या गवर्मेंट सिक्योरिटी में निवेश पर यील्ड जैसे बाहरी मानकों से संबद्ध की जाएंगी. इसका फायदा यह होगा कि RBI द्वारा पॉलिसी रेट घटाते या बढ़ाते ही कस्टमर्स के लिए लोन भी तुंरत सस्ते या महंगे हो जाएंगे. फिलहाल, बैंक अपने कर्ज पर दरों को प्रिंसिपल लेंडिंग रेट (PLR), बेंचमार्क प्रिन्सिपल लेंडिंग रेट (BPLR), बेस रेट और मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) जैसे आंतरिक मानकों के आधार पर तय करते हैं.

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