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केंद्रीय बजट से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने CBDT बजट टीम के साथ अहम बैठक की. इस दौरान राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव, CBDT चेयरमैन रवि अग्रवाल और CBDT के सदस्य (विधायी) प्रसेनजीत सिंह भी मौजूद रहे. बैठक में बजट से जुड़े अहम टैक्स और राजस्व मुद्दों पर चर्चा की गई.
Hon’ble Union Finance Minister Smt. @nsitharaman and Hon’ble MoS (Finance) Shri @mppchaudhary with the CBDT Budget team on the eve of the Union Budget, including Revenue Secretary Shri Arvind Shrivastava, Chairman CBDT Shri Ravi Agrawal, and Member (Legislation) CBDT Shri… pic.twitter.com/jravgVB0Ci
— Income Tax India (@IncomeTaxIndia) January 31, 2026
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तंबाकू उत्पादA. बजट सरकार की सालाना आर्थिक योजना होती है, जिसमें यह बताया जाता है कि सरकार अगले एक साल में पैसा कहां से कमाएगी और कहां खर्च करेगी. बजट इसलिए पेश किया जाता है ताकि देश की अर्थव्यवस्था को सही दिशा दी जा सके.
A. भारत में केंद्रीय बजट वित्त मंत्री संसद में पेश करते हैं. बजट राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लोकसभा में रखा जाता है.
A. आमतौर पर केंद्रीय बजट हर साल 1 फरवरी को पेश किया जाता है, ताकि नई टैक्स व्यवस्था और खर्च से जुड़े बदलाव 1 अप्रैल से लागू हो सकें.
A. बजट का असर टैक्स, महंगाई, नौकरी, सैलरी, पेंशन, सब्सिडी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी योजनाओं के ज़रिये सीधे आम लोगों की जेब और जीवन पर पड़ता है.
A. क्योंकि टैक्स से जुड़े बदलाव सीधे आपकी सैलरी, बचत और खर्च करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं. टैक्स स्लैब, छूट और डिडक्शन बजट का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला हिस्सा होता है.
A. नहीं. कुछ फैसले तुरंत लागू होते हैं, जबकि कई प्रस्तावों को कानून बनने या नोटिफिकेशन जारी होने के बाद लागू किया जाता है.
A. इकोनॉमिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति का विश्लेषण होता है, जबकि बजट भविष्य की आर्थिक योजना और खर्च का रोडमैप बताता है.
A. घाटा यह बताता है कि सरकार की कमाई और खर्च के बीच कितना अंतर है. यह देश की आर्थिक सेहत और उधारी पर असर डालता है.
A. हां, बजट में राज्यों को मिलने वाली हिस्सेदारी, ग्रांट, योजनाएं और केंद्र-राज्य फंडिंग से जुड़े फैसले भी शामिल होते हैं.
A. क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से रोजगार पैदा होता है, अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलती है और लंबे समय में विकास को सपोर्ट मिलता है.
A. हां, टैक्स, कैपेक्स और सेक्टर-स्पेसिफिक ऐलान शेयर बाजार पर तुरंत असर डालते हैं, खासकर बैंकिंग, इंफ्रा और FMCG जैसे सेक्टर पर.
A. बजट लागू होने के बाद संसद, CAG और अन्य संस्थाएं खर्च और योजनाओं की निगरानी करती हैं.
A. हां, सरकार बजट से पहले आम लोगों, इंडस्ट्री और एक्सपर्ट्स से सुझाव मांगती है, ताकि बजट ज्यादा व्यावहारिक बन सके.
A. बजट का मकसद आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, महंगाई नियंत्रण और समाज के कमजोर वर्गों को सपोर्ट करना होता है.
A. नहीं, कई बार बजट स्थिरता पर फोकस करता है और कई बार बड़े सुधारों पर. यह देश की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है.