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मरीन इंश्योरेंस पॉलिसी ट्रांसपोर्ट के सभी रिसोर्स जैसे सड़क, रेलवे, वायु, समुद्र, कोरियर और पोस्टल सर्विस के लिए कवरेज देता है. मरीन कार्गो इंश्योरेंस खासतौर से आग, विस्फोट, हाईजैक, दुर्घटनाओं, टक्करों और पलटने के कारण होने वाले नुकसान को कवर करता है. इसके साथ ही चोरी और माल की गैर-डिलीवरी, लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान नुकसान, माल/कार्गो की गलत हैंडलिंग के रिस्क को भी ये कवर करते हैं. इसके लिए इंश्योर्ड अपने बिजनेस को ध्यान में रखकर कवरेज सिलेक्ट कर सकते हैं. ये पॉलिसी कई तरह की वैराईटी के लिए मौजूद है. अगर कोई थर्ड पार्टी किसी कारण डायरेक्टली या इन्डरेक्टली तरह से अफेक्ट होते हैं. तो ऐसे में Marine Insurance थर्ड पार्टी को भी कवर करता है. बिजनेस शिपमेंट आमतौर पर महंगे होते हैं. इसलिए अगर सामान के साथ कोई भी नुकसान होता है तो ये आपके बिजनेस पर सीधे इम्पैक्ट डालेगा. इसलिए मरीन इंश्योरेंस को इंडिविजुअल और बिजनेस दोनों के लिए लेना जरुरी है.
Marine Insurance Act,1963 को भारत में 1 अगस्त, 1963 को पेश किया गया था. ये हल, कार्गो और माल ढुलाई के मरीन इंश्योरेंस की लेनदेन को रेगुलेट करने के लिए बनाया गया है.
अगर हम सिर्फ एक अकेले इंसान की ही बात करें तो रिलोकेशन लाइफ के सबसे स्ट्रेसफुल इवेंट में से होता है. चाहे शादी की वजह से हो या फिर जॅाब चेंज करने के कारण लोगों को अपनी लाइफ में बहुत बार रिलोकेट होना पड़ता है. ऐसे में इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट के कारण सामान के डैमेज होने का खतरा बना रहता है. मरीन इंश्योरेंस से आपको शिपिंग के दौरान होने वाले किसी भी तरह के डैमेज से प्रोटेक्शन मिलता है.
एक बिजनेस पर्सन होने के नाते आपका सामान आपके लिए सबसे कीमती है. ये आपके रेवेन्यू का सोर्स है. इसलिए किसी भी तरह की कंडीशन से अपने सामान को सेफ रखना अपने फ्यूचर और बिजनेस को सेफ रखने की तरह ही है. इसी तरह जब आप कहीं रिलोकेट होते हैं तो अपने घरेलू सामान की भी सेफ्टी चाहेंगे. मरीन इंश्योरेंस खरीदने के बाद आप इन तरह की टेंशन से फ्री हो जाते हैं.
इस पॅालिसी के तहत ट्रांसपोर्टेशन के सभी मोड जैसे कि एयर, वाटर, रेल, रोड कवर होते हैं. इसके साथ ही कूरियर सर्विस से ले जाए जा रहे सामानों का इंश्योरेंस भी इसके तहत होता है. इस पॅालिसी को लेने के बाद ट्रांजिट में आपके सामान के साथ सोर्स से डेस्टिनेशन तक किसी भी तरह की अनहोनी होती है. जैसे कि वाहन टक्कर, गाड़ी पलटना, पटरी से उतरने या एक्सीडेंट तो ये सब इसमें कवर होता है. इसके साथ ही चोरी, हड़ताल, दंगे, आतंकवाद और हॅास्टाइल एक्ट के कारण होने वाले नुकसान के लिए कवरेज को एक्सटेंड भी किया जा सकता है.
मरीन इंशेयोरेंस पॅालिसी कई तरह की होती हैं. ये अलग-अलग कस्टमर को ध्यान में रखकर ऑफर की जाती हैं. खासतौर पर इम्पोर्ट, एक्सपोर्ट, इनलेंड मरीन इंश्योरेंस, मरीन कार्गो इंश्योरेंस और हल इंश्योरेंस पापुलर हैं.
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