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जल्दी बोई जाने वाली किस्मों पर नहीं होगा गर्मी का असर. (Image- Pixabay)
Wheat Crop: फरवरी महीने में गर्मी के तेवर ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. सरकार ने गेहूं की फसल पर गर्मी में बढ़ोतरी के प्रभाव की निगरानी के लिए एक कमिटी बनाई है. यह कदम नेशनल क्रॉप फॉरकास्ट सेंटर (NCFC) के इस अनुमान के बीच आया है कि मध्य प्रदेश को छोड़कर प्रमुख गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में अधिकतम तापमान फरवरी के पहले हफ्ते के दौरान पिछले 7 वर्षों के औसत से ज्यादा था. भाषा की खबर के मुताबिक, मौसम विभाग (Met Department) ने भी अगले दो दिन में गुजरात, जम्मू, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने का अनुमान जताया है.
कृषि सचिव मनोज आहूजा ने कहा कि गेहूं की फसल (wheat crop) पर गर्मी में बढ़ोतरी से पैदा होने वाली स्थितियों की निगरानी के लिए हमने एक कमिटी का गठन किया है. उन्होंने कहा कि कमिटी सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) को अपनाने के लिए किसानों को परामर्श जारी करेगी.
उन्होंने कहा कि कृषि आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति में करनाल स्थित गेहूं अनुसंधान संस्थान (Wheat Research Institute) के सदस्य और प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों के प्रतिनिधि भी होंगे. हालांकि, सचिव ने कहा कि जल्दी बोई जाने वाली किस्मों पर तापमान में बढ़ोतरी का असर नहीं होगा और यहां तक कि गर्मी प्रतिरोधी किस्मों को भी इस बार बड़े क्षेत्रों में बोया गया है.
फसल वर्ष 2022-23 (जुलाई-जून) में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 11.21 करोड़ टन रहने का अनुमान है. कुछ राज्यों में लू की स्थिति के कारण पिछले वर्ष गेहूं का उत्पादन मामूली रूप से घटकर 10 करोड़ 77.4 लाख टन रह गया था. गेहूं एक प्रमुख रबी फसल (Rabi Crop) है, जिसकी कटाई कुछ राज्यों में शुरू हो गई है.
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