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Pakistan economic Crisis
Pakistan economic crisis: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान आर्थिक तंगी से बेहाल हो रहा है. देश की आम जनता की मुश्किलें हर दिन बढ़ रही है. आईएमएफ की शर्तों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉ. आरिफ अल्वी ने मिनी बजट को मंजूरी दे दी है. इसके बाद जनता पर टैक्स की मार बढ़ गई है. गौरतलब है कि मुसीबत से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान को आईएमएफ ने 57 हजार करोड़ रुपए के बैलआउट पैकेज की उम्मीद है. वहीं, पाक के कई राजनेता कह चुके हैं कि मुल्क कभी भी दिवालियां हो सकता है.
किसी देश की सरकार ने लोन लिया है लेकिन, वह इसे समय पर नहीं चुका पा रही है. साथ ही उसकी लोन चुकाने की मंशा भी नहीं है तो वह देश दिवालिया घोषित हो सकता है. एक बार यदि कोई देश दिवालिया घोषित हो जाता है तो उसे नया लोन नहीं मिलता है. इसके अलावा वह आयात भी नहीं कर सकता है. ऐसे में यदि पाकिस्तान दिवालिया घोषित होता है तो पहले दिन से ही देश के लिए आपातकाल वाली हालत हो जाएगी. दिन की शुरुआत स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट से होगी. कई फैक्ट्रियां और इंडस्ट्री दिवालिया घोषित करना शुरू कर देगी.
दिवालिया घोषित होने के तुरंत बाद पाकिस्तान का रुपया बहुत तेजी के साथ गिरने लगेगा. कच्चा माल का आयात पूरी तरह से ठप हो जाएगा. इसका नतीजा होगा कि कई सेक्टर पूरी तरह से बंद हो जाएंगे. देश में तेल की भारी किल्लत हो सकती है, इससे एयरलाइंस और शिंपिंग कंपनियां सर्विस बंद कर सकती है. खाने से लेकर दवाओं की कमी हो सकती है. एक महीना खत्म होने तक लोग बैंक से अपनी बचत निकालना शुरू कर देंगे. वित्तीय सिस्टम चरमरा सकता है. इससे अपराध और अन्य असमाजिक गतिविधियां बढ़ सकती है.
एक साल बाद पाकिस्तान में जो गरीब हैं वह पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे. जिन लोगों के पास पैसे हैं वह विदेश जा सकते हैं. पाकिस्तान को पैसे के लिए हर एक शर्त माननी होगी. इसका असर होगा कि कर्ज देने वाले दख्लअंदाजी करेंगे, जिससे सत्ता और शासन का पूरा मॉडल बदल जाएगा.