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Trans Asia Rail Network: विदेश की यात्रा अभी तक फ्लाइट्स के जरिए ही मुमकिन होती है. लेकिन, क्या पता एक दिन ट्रेन के जरिए भी विदेश की यात्रा करना संभव होगा. यूरोप के बाद एशियन देशों के लिए ट्रांस एशिया रेल प्रोजेक्ट के जरिए ये जल्द ही मुमकिन होगा. इस परियोजना के जरिए भारतीय रेल अंतरराष्ट्रीय रेल नेटवर्क का हिस्सा बन रही है. दरअसल भारतीय रेल उन 28 देशों में शामिल है जो ट्रांस एशिया रेलवे नेटवर्क का हिस्सा है. इसका उद्देश्य एशिया में रेलवे के बुनियादी ढांचे को विकसित करना है.
ट्रांस एशिया रेल प्रोजेक्ट के साउदर्न कॉरीडोर की प्रमुख कड़ी है.ये बंग्लादेश म्यांमार को चीन और थाईलैंड ट्रैक से जोड़ेगा. भारतीय रेल ने इसके लिए पूर्वोत्तर राज्यों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की शुरुआत कर दी है. इसके तहत 118 किलोमीटर के नॉर्थ ईस्ट फ्रंटीयर रेलवे सर्वेक्षण का काम चल रहा है. ये मणिपुर की राजधानी इंफाल को सीधे सीमावर्ती मोराह और पश्चिमी म्यांमार के तामो से जोड़ देगा. इसके अलावा त्रिपुरा से मिजोरम होते हुए म्यांमार के डरलोन को जोड़ने की योजना है.
ट्रांस एशिया रेल प्रोजेक्ट के जरिए त्रिपुरा की राजधानी अगरतला को बांग्लादेश के अखुराह से जोड़ने का काम जारी है. 15 किलोमीटर का ट्रैक पूरा होते ही बांग्लादेश की राजधानी ढाका भी रेल मार्ग पर आ जाएगी. इस तरह से भारतीय रेल ट्रांस एथियन रेलवे नेटवर्क थाइलैंड, चीन से म्यांमार, बांग्लादेश, भारत होते हुए ईरान और तुर्की से दक्षिणी कॉरिडोर का एक अहम हिस्सा बन जाएगी. ये एशिया और यूरोप के बीच व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने की एक कड़ी है.
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ट्रांस एशिया रेलवे नेटवर्क से जुड़कर भारत के पूर्वोत्तर राज्य दक्षिण-पूर्वी एशिया देशों के गेटवे साबित होंगे. इस प्रोजेक्ट्स के जरिए एशिया में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर अंतरराष्ट्रीय परिवहन, रसद प्रणाली, बंदरगाह नेटवर्क को मजबूत करना भी है.