फर्टिलाइजर सेक्टर में भारतीय कंपनी की छलांग, अब अमेरिका को Nano Liquid Urea एक्सपोर्ट करेगा IFFCO

Nano-Liquid Urea: इफको ने (IFFCO) ने अमेरिका को लिक्विड नैनो यूरिया (Nano Liquid Urea) के एक्सपोर्ट लिए कैलिफोर्निया स्थित कपूर एंटरप्राइजेज इंक (Kapoor Enterprises Inc) के साथ एक समझौता किया है.
फर्टिलाइजर सेक्टर में भारतीय कंपनी की छलांग, अब अमेरिका को Nano Liquid Urea एक्सपोर्ट करेगा IFFCO

इफको ने अब संयुक्त राज्य अमेरिका को नैनो लिक्विड यूरिया का निर्यात शुरू कर दिया है. (File Photo)

Nano-Liquid Urea: प्रमुख उर्वरक सहकारी संस्था इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) ने अमेरिका को लिक्विड नैनो यूरिया (Nano Liquid Urea) के निर्यात के लिए कैलिफोर्निया स्थित कपूर एंटरप्राइजेज इंक (Kapoor Enterprises Inc) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अमेरिका यात्रा के दौरान 21 जून को इस समझौते पर हस्ताक्षर किये गये थे. सहकारी संस्था ने एक बयान में कहा, इफको ने अब संयुक्त राज्य अमेरिका को नैनो लिक्विड यूरिया का निर्यात शुरू कर दिया है.

हालांकि, इफको ने कपूर एंटरप्राइजेज से मिले अनुबंध की मात्रा और मूल्य के बारे में कोई विवरण नहीं दिया. मौजूदा समय में, यह सहकारी संस्था 25 से अधिक देशों में 5 लाख से अधिक बोतल Nano-Liquid Urea का एक्सपोर्ट कर रही है.

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एक बैग यूरिया की ताकत एक बोतल में

इफको (IFFCO) ने जून 2021 में दुनिया का पहला नैनो यूरिया उर्वरक शुरू किया, जबकि इस साल अप्रैल में नैनो डीएपी (Nano DAP) शुरू किया गया. इफको नैनो लिक्विड यूरिया (Nano-Liquid Urea) की 500 मिलीलीटर की बोतल, पारंपरिक यूरिया के कम से कम एक बैग की जगह ले लेगी. सहकारी संस्था ने कहा कि यह बोतल ‘लॉजिस्टिक’ और भंडारण की लागत को काफी कम कर सकती है. इसमें कहा गया है कि कमर्शियल मार्केट में अपनी स्थापना के बाद से इफको भारत में नैनो लिक्विड यूरिया की 5.7 करोड़ से अधिक बोतलें बेच चुकी है.

नैनो यूरिया के फायदे

नैनो यूरिया (Nano Urea) को पौधों के पोषण के लिए प्रभावी और कुशल पाया गया है. अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्रीय वर्षा आधारित तराई चावल अनुसंधान स्टेशन, गेरुआ (असम) और आईआरआरआई-आईएसएआरसी परीक्षण (खरीफ 2021) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार अगर देश अपने चावल क्षेत्र का 50% नैनो यूरिया के तहत लाता है, तो ग्रीन हाउस गैस में 4.6 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर कमी ला सकता है.

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