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Jute Packaging: चीनी के लिए 20% अनिवार्य जूट पैकेजिंग करनी होगी. खाद्य विभाग ने मामले में शुगर कंपनियों को चिट्ठी लिखी है. इसमें शुगर सीजन 2023-24 के लिए अनिवार्य 20% जूट पैकेजिंग को सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. जूट वर्ष के दौरान पैकिंग और वापस मंगाए जूट बैग और नई खरीद के लिए NSWS पोर्टल पर P-2 फॉर्म में जोड़ा गया है. खाद्य विभाग ने चेताया कि सरकार में विभिन्न स्तर पर इसकी मॉनीटरिंग और समीक्षा हो रही है. इसकी पालन नहीं किए जाने पर कार्रवाई हो सकती है.
सरकार ने इससे पहले अनिवार्य जूट पैकेजिंग की डेडलाइन को 31 मार्च 2023 तक बढ़ा दिया था. साथ ही सरकारी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म GeM पोर्टल के जरिए जूट बैग खरीदे जाएंगे. राज्यों की तरफ से 10 प्रतिशत जूट बैग सप्लाई उल्टी नीलामी के जरिये की जाएगी. वहीं, बांग्लादेश, नेपाल से आयातित जूट पर एंटी डंपिंग ड्यूटी अगले पांच साल के लिए जारी रहेगी. DGTR की सिफारिश पर वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में नोटीफिकेशन जारी किया था.
सरकार इससे पहले जूट पर प्राइस कैप को मई 2022 में ही हटा चुकी है. कीमतों में घटती प्रवृत्ति से जूट वस्तुओं के निर्यात को भी फायदा होगा जो मूल्य के संदर्भ में उद्योग के कारोबार का लगभग 30 प्रतिशत है. गौरतलब है कि सरकार ने अनिवार्य जूट पैकेजिंग की डेडलाइन 30 सितंबर से बढ़ाकर दिसंबर 2022 तक कर दी थी. जूट कंपनी ग्लोस्टर, Cheviot Company और Ludlow Jute फिलहाल मार्केट में लिस्टेड हैं.
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फरवरी में कैबिनेट की एक बैठक में जूट ईयर वर्ष 2022-23 के लिए नियमों को मंजूरी देने का फैसला लिया गया था. इस मंजूरी के बाद, अब 100 प्रतिशत फूडग्रेन्स और कुल चीनी प्रोडक्शन का 20 प्रतिशत पैकेंजिंग जूट की बोरी में ही करने का रास्ता साफ हो गया था. आपको बता दें कि जूट एक नेचुरल, बायोडिग्रेडेबल, रिन्युअल और दोबारा इस्तेमाल वाला फाइबर है. जूट की बोरी की सबसे ज्यादा सप्लाई भारतीय खाद्य निगम और राज्य खरीद एजेंसियों को की जाती है.