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RBI Direct scheme: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) शुक्रवार 12 नवंबर को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रिटेल डायरेक्ट स्कीम लॉन्च करेंगे. गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (Government Securities) में रिटेल पार्टिसिपेशन बढ़ाने के लिए इस स्कीम को लॉन्च किया जा रहा है. इसके बाद रीटेल निवेशकों (Retail Investors) के लिए सरकारी सिक्योरिटीज (G-Sec) को खरीदना आसान हो जाएगा. स्कीम के तहत रिटेल इन्वेस्टर्स को प्राइमेरी और सेकेंडरी दोनों गवर्नमेंट सिक्योरिटीज मार्केट का ऑनलाइन एक्सेस मिलेगा. अभी तक इस तरह सिर्फ बैंक या संस्थागत निवेशक ही इसे एक्सेस कर पाते थे.
RBI की रिटेल डायरेक्ट स्कीम का ऐलान 5 फरवरी 2021 में गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने किया था. शक्तिकांत दास ने इसे महत्वपूर्ण स्ट्रक्चरल सुधार बताया था. स्कीम से रीटेल निवेशकों की सरकारी सिक्योरिटीज मार्केट तक पहुंच आसान हो जाएगी. वहीं, रीटेल निवेशक अब मुफ्त में RBI में अपना सरकारी सिक्योरिटीज अकाउंट (रिटेल डायरेक्ट गिल्ट अकाउंट- RDG) खोल सकते हैं.
RDG अकाउंट को ऑनलाइन खोला जा सकता है. इसका फॉर्म सबमिट करने के लिए आपको रजिस्टर्ड फोन नंबर और ईमेल आईडी पर आए OTP को दर्ज करना होगा. स्कीम के तहत रिटेल इन्वेस्टर मुफ्त में RBI के साथ अपना गवर्नमेंट सिक्योरिटीज अकाउंट (गिल्ट अकाउंट) ओपन और मेंटेन कर सकेंगे. जुलाई में RBI ने ऐलान किया था कि इन्वेस्टर्स के पास प्राइमेरी ऑक्शन में बोली लगाने का एक्सेस होगा. साथ ही गवर्नमेंट सिक्योरिटीज के लिए सेंट्रल बैंक के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का एक्सेस भी इन्वेस्टर्स को मिलेगा.
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के इस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को नेगोसिएटेड डीलिंग सिस्टम ऑर्डर मैचिंग (NDS-OM) कहते हैं. इसके जरिए सेकेंडरी मार्केट में ट्रेडिंग होती है. 2005 में इसे लॉन्च किया गया था. इस सिस्टम को सेकेंडरी मार्केट ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता लाने के लिए डिजाइन किया गया है.
सरकारी सिक्योरिटीज या गवर्नमेंट सिक्योरिटीज को सरकार की तरफ से जारी किया जाता है. इन्हें G-Sec भी कहते हैं. RBI के मुताबिक, सरकारी सिक्योरिटी, केंद्र सरकार या राज्य सरकारें जारी करती हैं और इसमें ट्रेडिंग की जाती है. फंड जुटाने के लिए इन्हें जारी किया जाता है. ट्रेजरी बिल और डेट सिक्टोरिटी के रूप में इन्हें जारी किया जाता है. ट्रेजरी बिल 91 दिनों, 182 दिनों और 364 दिनों के लिए जारी किए जाते हैं. वहीं, डेट सिक्योरिटी 5 से 40 सालों तक के लिए जारी किए जाते हैं.