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Earth's Core
हाल ही में एक रिसर्च सामने आई है. रिसर्च में बताया गया है कि धरती (Earth) की सबसे अंदर वाली लेयर ने घूमना बंद कर दिया है. साथ ही भूकंप के झटके भी सबने महसूस किए है. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि कहीं इसी वजह से तो इतने भूकंप (Earthquake) नहीं आ रहे हैं? क्या ये सच है? आखिर ऐसा हुआ क्यों? क्या अब पूरी धरती घूमना बंद कर देगी? आइए पूरा मामला समझते हैं.
धरती पर तीन सतह होती हैं. सबसे अंदर कोर (Core), उसके ऊपर मैंटल (Mantle) और सबसे ऊपर क्रस्ट (Crust). धरती के सबसे अंदर वाली सतह के दो हिस्से होते हैं. भीतरी कोर (Inner Core) और बाहरी कोर (Upper Core). रिसर्च में फोकस भीतरी कोर पर किया गया हैं.
भीतरी कोर की खोज सिस्मिक वेव्स (Seismic Waves) की वजह से 1936 में हुई थी. सिस्मिक वेव्स वही वेव्स होती है जिनकी वजह से भूकंप आता हैं. भीतरी कोर ठोस आयरन (Solid Iron) से बना हुआ है. ये ठोस आयरन चारो तरफ से लिक्विड आयरन (Liquid Iron) से घिरा हुआ है. ऐसा माना जाता है कि इस हिस्से के घूमने से धरती के घूमने की गति भी तेज़ होती हैं. लेकिन हाल ही में पीकिंग यूनिवर्सिटी (Peking University) के साइंटिस्ट्स यांग और सोंग का रिसर्च सामने आया है. इसमें 1995 से 2021 के बीच आए भूकंप की रिसर्च है. इसमें सामने आया कि भीतरी कोर 2009 में घूमना बंद हो गया था और जब उसने फिरसे घूमना शुरू किया तो उसकी दिशा बदल चुकी थी.
इससे पहले भी 1996 में पीकिंग यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट्स ने सिस्मिक वेव्स में बदलाव नोटिस किए थे. सदर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी (Southern California University) के वैज्ञानिकों ने भी पता लगाया था कि 1969 से 1971 के बीच इनर कोर के घूमने की गति कुछ धीमी हो गई थी. 1971 के बाद ही इनर कोर फिर से अपनी तेज़ गति में घूमने लगा था. रीसरचर्स का मानना है कि ये भीतरी कोर के सिकुड़ने और फैलने की वजह से होता है. उनका मानना है कि भीतरी कोर की गति का सीधा कनेक्शन धरती के बाकी हिस्सों से है. ये हिस्से धरती की गति को तो प्रभावित करते ही हैं, इसके साथ ही दिन और रात के समय पर भी इनका असर पड़ सकता है.
सिस्मिक वेव्स की वजह से ही ये पता चला. यांग और सोंग ने सिस्मिक वेव्स का अध्ययन किया. उन्होंने पाया कि धरती के भीतरी कोर तक पहुंचने के बाद तरंगें अपना पैटर्न बदल रही हैं. इसका मतलब है कि भीतरी कोर धरती की ऊपरी सतह के साथ नहीं घूम रहा है. इससे ये पता चलता है कि भीतरी कोर में बदलाव हो रहे हैं. लेकिन उनका कहना है कि धरती पर रहने वाले लोगों पर कुछ बड़ा असर होगा या नहीं ये कहना मुश्किल है.
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