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बड़ों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए फोन बहुत जरूरी हो गया है. बातचीत हो या ऑनलाइन शॉपिंग, एक क्लिक में मोबाइल से कई सारे काम पूरे किए जा सकते हैं. हालांकि, आज के दौर में बच्चे भी फोन के बिना नहीं रह सकते. छोटे बच्चे अक्सर घंटों तक फोन पर वीडियो देखने या गेम खेलने के लिए जिद्द करते हैं. वहीं, टीनएजर्स रील्स या सोशल मीडिया पर ऐक्टिव रहने के लिए फोन से चिपके रहते हैं. फोन का एक लिमिट से ज्यादा इस्तेमाल हानिकारक साबित हो सकता है. इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर ज्यादा स्क्रीन टाइम होने से आखों पर गलत प्रभाव पड़ता है. डिवाइस से निकलने वाली किरणें हमारी आखों को खराब करती हैं. साथ ही इससे हमारी मेंटल हेल्थ पर भी गलत असर पड़ता है.
अगर आपके बच्चे भी फोन का घंटों तक इस्तेमाल करते हैं और उनकी इस आदत से आप परेशान रहते हैं तो हम आपके लिए कुछ टिप्स लाए हैं. कुछ खास बातों को ध्यान रखकर और इन 6 ट्रिक्स अपनाने के बाद, आप बच्चों की फोन चलाने की आदत को कंट्रोल कर सकते हैं.
अपने बच्चों को समझाएं कि अगर वो फ्री हैं तो आपके साथ घर के काम में मदद करें. ऐसा करने से वो रिपॉन्सिबल बनेंगे और उनके किसी भी काम को करने की समझ बढ़ेगी. साथ ही इस समय आपको भी उनसे बातचीत करने का खास टाइम मिलेगा.
बच्चों को मोटिवेट करें कि वो फोन चलाने के बजाय घर-घर या डॉक्टर-डॉक्टर जैसे इमेजिनरी गेम्स खेलें. ऐसा करने से उनकी सोचने की शक्ति बढ़ती है और वो बेहतर तरीके से किसी भी सिचुएशन के हेंडल कर सकेंगे.
बोर्ड गेम्स ब्रेन एक्सरसाइज के लिए बेहद दमदार साबित हो सकते हैं. पेरेंट्स कोशिश करें कि फोन पर घंटों बिताने के बजाय आपका बच्चा बोर्ड गेम्स खेलें. आप भी बच्चों के साथ बोर्ड गेम्स खेल सकते हैं. इससे आप भी क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकेंगे.
बच्चे आमतौर पर फोन का इस्तेमाल अकेलेपन से दूर रहने के लिए करते हैं. लंबे समय तक ऐसा होने के कारण, फोन यूज करने की आदत बन जाती है. इस कंडिशन में फ्री टाइम में आप उनसे बातचीत करें. बच्चों के साथ टाइम स्पेंड करने पर वो आपसे बातें शेयर करेंगे और इससे पेरेंटिंग भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी.
किसी भी डिवाइस के इस्तेमाल करने के बजाय अपने बच्चों को उनके पंसद की बुक पढ़ने को कहें. ये उनकी थिंकिंग पावर और चीजें एक्सप्रेस करने के तरीके को बूस्ट करेगा.
अगर आपका बच्चा दिन में फ्री रहता है तो उन्हें बिजी रखने के लिए कोई एक्सट्रा क्लास जॉइन करवाएं. डांस, सिंगिंग या आर्ट एंड क्राफ्ट जैसे कोर्स बच्चों की स्किल डेवलपमेंट के लिए जरूरी होते हैं.