CoronaVirus: पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता! एक झटके में 4 रुपए तक गिर सकता है भाव

कोरोना वायरस के कहर के चलते चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है. चीन में कोरोना वायरस से फैले आतंक से भारत को फायदा मिल रहा है. दरअसल चीन में फैले कोरोना वायरस के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की मांग घटी है. इसके चलते भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी आ रही है. पिछले एक महीने में पेट्रोल के दाम दो रुपये कम हो चुके हैं. अगले दो हफ्ते में पेट्रोल चार रुपये तक और सस्ता हो सकता है.
CoronaVirus: पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता! एक झटके में 4 रुपए तक गिर सकता है भाव

पेट्रोल - डीजल के दामों में अभी और आएगी कमी  (फाइल फोटो)

कोरोना वायरस के कहर के चलते चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है. चीन में कोरोना वायरस से फैले आतंक से भारत को फायदा मिल रहा है. दरअसल चीन में फैले कोरोना वायरस के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की मांग घटी है. इसके चलते भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी आ रही है. उधर, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी(आईईए) का अनुमान है कि इस साल की पहली तिमाही में कच्चे तेल की वैश्विक खपत मांग पिछले साल के मुकाबले 4.35 लाख बैरल घट सकती है. पिछले एक महीने में पेट्रोल के दाम दो रुपये कम हो चुके हैं. अगले दो हफ्ते में पेट्रोल चार रुपये तक और सस्ता हो सकता है.

अभी और सस्ता हो सकता है तेल
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में बीते सप्ताह तेजी लौटी, लेकिन चीन में कोरोनावायरस (Corona Virus) के प्रकोप के कारण तेल की मांग नरम रहने से कीमतों में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं दिख रही है. चीन में कोरोना वायरस का प्रकोप महामारी का रूप ले चुका है और इसकी चपेट में आने से 1,600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

ओपेक ने तेल के उत्पाद में कमी के संकेत दिए

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तेल उत्पादक देशों का संगठन ओपेक और रूस द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में अतिरिक्त कटौती करने के संकेत दिए जाने से बीते सप्ताह कीमतों में तेजी आई, लेकिन जानकार बताते हैं कि मांग घटने के कारण कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने कहा कि कोरोनावायरस से चीन में परिवहन व्यवस्था और उद्योग-धंधे प्रभावित हुए हैं, जिसके कारण कच्चे तेल की मांग काफी घट गई है. इसलिए कीमतों पर दबाव बना रहेगा.तेल की घटती कीमतों को थामने के मकसद से ओपेक और रूस द्वारा उत्पादन में छह लाख बैरल अतिरिक्त कटौती करने के संकेत दिए जाने से कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर पूछे गए सवाल पर तनेजा ने कहा, "ओपेक और रूस द्वारा तेल के उत्पादन में अगर कटौती की जाती है तो भी मुझे नहीं लगता है कि तेल की कीमत वापस 60 डॉलर प्रति बैरल तक जाएगी."

06 लाख बैरल तेल का उत्पादन घटाने पर चल रही है बात

ओपेक और रूस अगर अतिरिक्त छह लाख बैरल रोजाना तेल के उत्पादन में कटौती का फैसला लेता है तो उत्पादन में उसकी कुल कटौती 23 लाख बैरल रोजाना हो जाएगी, यही कारण है कि बीते सप्ताह तेल के दाम में तेजी देखने को मिली. हालांकि तनेजा का कहना है कि कोरोनावायरस के प्रकोप के असर से जब तक चीन की अर्थव्यवस्था उबरकर वापस पटरी पर नहीं आएगी तब तक तेल के दाम पर दबाव बना रहेगा. उन्होंने कहा कि तेल का लिंक बहरहाल चीन में कोरोनावायरस और अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से है.

अमेरिका चाहते है कि तेल की कीमतें नियंत्रित रहें

उन्होंने कहा कि अमेरिका में इस साल राष्ट्रपति चुनाव है और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहेंगे कि तेल कीमतें नियंत्रण में रहे, क्योंकि अमेरिका में वहीं राष्ट्रपति दोबारा चुना जाता है जो तेल के दाम को नीचे रखता है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में 2020 की पहली तिमाही में तेल की वैश्विक मांग अनुमान में पिछले साल के मुकाबले 4.35 लाख बैरल की कटौती की है. बीते एक दशक में यह पहला मौका होगा, जब तेल की सालाना मांग में कमी दर्ज की जाएगी. इससे पहले एजेंसी ने तेल की खपत मांग में पिछले साल के मुकाबले आठ लाख बैरल रोजाना का इजाफा होने का अनुमान लगाया था.

तेल की मांग में होगी इतनी वृद्धि

आईईए के अनुसार, 2020 में पूरे साल के दौरान तेल की मांग में वृद्धि महज 8.25 लाख बैरल रोजाना होने का अनुमान है, जोकि पिछले अनुमान से 3.65 लाख बैरल कम है. इस प्रकार 2011 के बाद तेल की सालाना मांग में यह सबसे कम वृद्धि होगी. अंतर्राष्ट्रीय बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर बीते सप्ताह शुक्रवार को बेंट क्रूड का अप्रैल अनुबंध 57.33 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि सप्ताह के आरंभ में सोमवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 53.27 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था.

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