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Home Loan EMI: रिजर्व बैंक ने एकबार फिर से रेपो रेट 35 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाने का फैसला किया. अब रेपो रेट 5.9 फीसदी से बढ़कर 6.25 फीसदी हो गया है. जाहिर सी बात है कि इसका असर होम लोन लेने वालों पर होगा. जो होम लोन रेपो रेट से लिंक्ड होंगे, उनका इंटरेस्ट रेट तुरंत बढ़ जाएगा. अगले महीने से ही EMI का बोझ बढ़ने वाला है. रिजर्व बैंक ने लगातार पांचवीं बार इंटरेस्ट रेट बढ़ाया है. आठ महीने के भीतर रेपो रेट 4 फीसदी से बढ़कर 6.25 फीसदी पर पहुंच गया है. कुल बढ़ोतरी 2.25 फीसदी की हुई है. इस बढ़ोतरी के कारण होम लोन धारकों की EMI का बोझ काफी बढ़ गया है.
मान लीजिय कि आपने 30 लाख का लोन लिया है. अप्रैल 2022 तक रेपो रेट 4 फीसदी था. उस समय होम लोन के लिए औसत दर 6.75 फीसदी के करीब थी. ईएमआई कैलकुलेटर के मुताबिक, 20 सालों की अवधि वाले लोन पर उस हर महीने की ईएमआई 22811 रुपए प्रति महीने थी. अब जब रेपो रेट में 2.25 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है तो होम लोन की औसत दर बढ़कर 9 फीसदी के करीब पहुंच चुकी है. अब 20 सालों के सेम होम लोन के लिए मंथली ईएमआई बढ़कर 26992 रुपए हो गई है.
इस तरह आठ महीने के भीतर 30 लाख के होम लोन पर मंथली ईएमआई में करीब 4200 रुपए का उछाल आया है. अप्रैल 2022 के मुकाबले जनवरी 2023 में होम लोन की ईएमआई में करीब 18 फीसदी का उछाल आया है. अगर होम लोन की अवधि 30 सालों की होगी तो औसत EMI में करीब 24 फीसदी तक की तेजी दर्ज की जाएगी.
मई में पहली बार रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की गई थी. यह बढ़ोतरी अचानक हुई थी. उसके बाद जून-अगस्त और सितंबर में लगातार तीन बार 50-50 बेसिस प्वॉइंट्स की बढ़ोतरी की गई. दिसंबर में लगातार पांचवीं बढ़ोतरी है. रिजर्व बैंक मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की अगली बैठक 6 से 8 फरवरी 2023 को होगी. जानकारों का कहना है कि अभी रेपो रेट में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.
रेपो रेट पर लोन के असर को लेकर hBits के फाउंडर शिव पारेख ने कहा कि कमर्शियल रियल एस्टेट में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है. इंटरेस्ट में उठापटक के बावजूद इसमें निवेश जारी है. रेपो रेट 35 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ने के कारण होम लोन महंगा जरूर होगा, लेकिन कमर्शियल प्रॉपर्टी पर इसका बड़ा असर नहीं होगा. रिजर्व बैंक का फोकस इस समय महंगाई को कंट्रोल में रखने पर है. ईएमआई बढ़ने के बावजूद रियल एस्टेट में सेल्स पर बहुत ज्यादा असर नहीं होने की संभावना है. इंडस्ट्री का मानना है कि आने वाले समय में इंटरेस्ट रेट में कमी की जाएगी, जिसका सकारात्मक असर होगा. जब ऐसा होगा तो मांग में नई तेजी आएगी. इससे लिक्विडिटी में भी सुधार आएगा.
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