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पब्लिक प्रोविडेंट फंड (Public Provident Fund) एक सरकारी स्कीम है जिसमें लंबे समय के लिए निवेश किया जा सकता है और अच्छा खासा फंड जमा किया जा सकता है. मौजूदा समय में इस अकाउंट पर 7.1 फीसदी का ब्याज मिलता है. PPF अकाउंट किसी भी पोस्ट ऑफिस या बैंक में ओपन करवाया जा सकता है. कोई भी भारतीय नागरिक इस स्कीम में इन्वेस्ट कर सकता है. इसके अलावा इस स्कीम में इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत टैक्स बेनिफिट भी मिलता है. लेकिन फिर भी पीपीएफ में निवेश करने से पहले आपको इससे जुड़े कुछ नियमों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए, जिन पर कई बार लोग ध्यान नहीं देते.
तमाम स्कीम्स में एक से ज्यादा अकाउंट खुलवाने की सुविधा होती है, लेकिन पीपीएफ में एक व्यक्ति एक से ज्यादा अकाउंट ओपन नहीं करवा सकता. अगर गलती से आपके 2 पीपीएफ खाते खोले जा चुके हैं तो दूसरे अकाउंट को वैध अकाउंट नहीं माना जाएगा. जब तक दोनों खातों को मर्ज नहीं किया जाता, तब तक उस पर ब्याज भी नहीं मिलेगा.
दूसरी तमाम स्कीम्स में आपको जॉइंट अकाउंट ओपन करने की सुविधा मिल जाती है, लेकिन पीपीएफ में ये सुविधा मौजूद नहीं है. हालांकि आप इसमें कई नॉमिनी जरूर बना सकते हैं और उनके अलग-अलग हिस्से भी तय कर सकते हैं. अगर अकाउंट होल्डर की किसी कारणवश मृत्यु हो जाती है तो नॉमिनी को वो रकम निकालने का अधिकार होता है.
पीपीएफ की ब्याज दर की बात करें तो समय के साथ इसकी ब्याज दर भी प्रभावित होती रहती है. अप्रैल 2019 से जून 2019 तक इसकी ब्याज दर 8 प्रतिशत थी, इसके बाद इसे घटाकर 7.9 फीसदी किया गया और फिर जनवरी-मार्च, 2020 में इसे 7.1 प्रतिशत कर दिया गया. तब से अब तक ये ब्याज दर 7.1 फीसदी पर ही बरकरार है. अगर आने वाले समय में ये ब्याज दर और कम हो जाती है, तो लोगों के पास इससे बेहतर रिटर्न देने वाले तमाम विकल्प मौजूद होंगे.
पीपीएफ में इन्वेस्टमेंट की अधिकतम लिमिट 1.5 लाख रुपए सालाना है. अगर आपकी सैलरी काफी अच्छी है और आप इस स्कीम में ज्यादा इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं, तो ऐसा नहीं कर सकते. ऐसे में आपको निवेश के दूसरे ऑप्शन तलाशने पड़ते हैं.