दिवाली से पहले घटे खाने के तेल के दाम, प्रमुख कंपनियों ने की कीमतों में कटौती

Edible Oil Price: दिवाली से पहले प्रमुख तेल कंपनियों ने खाने के तेल की कीमतों में गिरावट की है.
दिवाली से पहले घटे खाने के तेल के दाम, प्रमुख कंपनियों ने की कीमतों में कटौती

Edible Oil Price: फेस्टिव सीजन के दौरान कस्टमर्स को राहत देने के लिए अदानी विल्मर (Adani Wilmar) और रुचि सोया इंडस्ट्रीज (Ruchi Soya Industries) सहित समुख एडिबल ऑयल प्लेयर्स ने थोक कीमतों में 4 रुपये से लेकर 7 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती की है. इसके साथ ही अन्य कंपनियों के भी इसी तरह तेल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद है. इंडस्ट्री बॉडी सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) ने इसकी जानकारी दी.

इन कंपनियों ने गिराई कीमतें

जेमिनी एडिबल्स एंड फैट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (हैदराबाद), मोदी नेचुरल्स (दिल्ली), गोकुल रिफॉयल एंड सॉल्वेंट लिमिटेड (सिद्धपुर), विजय सॉल्वेक्स लिमिटेड (अलवर) गोकुल एग्रो रिसोर्सेज लिमिटेड और एनके प्रोटीन्स प्राइवेट लिमिटेड (अहमदाबाद) वह अन्य प्रमुख एडिबल ऑयल कंपनी है, जिन्होंने खाने के तेल की कीमतों में कमी की है.

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SEA के अपने सदस्यों से फेस्टिव सीजन के दौरान कस्टमर्स को तेल की बढ़ती कीमतों से राहत देने की अपील करने के बाद इन कंपनियों ने खाने के तेल की थोक कीमतों में यह राहत दी है. SEA प्रेसीडेंट अतुल चतुर्वेदी ने एक बयान में कहा कि इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया काफी उत्साहजनक है.

SEA ने कहा कि वे पहले ही तेल की थोक कीमतों में 4,000 -7,000 रुपये प्रति टन (4-7 रुपये प्रति लीटर) की कमी कर चुके हैं और अन्य कंपनियां भी इसे फॉलो कर रही हैं.

सोयाबीन और मूंगफली की फसल में आई तेजी

चतुर्वेदी ने कहा कि इस साल घरेलू सोयाबीन और मूंगफली की फसल में तेजी आ रही है, जबकि सरसो की बुवाई की शुरुआती रिपोर्ट बहुत उत्साहजनक है. इसके अलावा ग्लोबल एडिबल ऑयल सप्लाई की स्थिति में भी सुधार हो रही है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में और गिरावट आने की संभावना है. इससे आगामी शादियों के मौसम में भी घरेलू कीमतों में आ सकती है.

ग्लोबल कीमतों में वृद्धि का पड़ता है असर

भारत अपनी 60 फीसदी से अधिक एडिबल ऑयल की मांग को इम्पोर्ट के माध्यम से पूरा करता है. ग्लोबल कीमतों में किसी भी वृद्धि का स्थानीय कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ता है.

SEA ने कहा कि खाने की तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए, सरकार ने अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में आयात शुल्क में कमी सहित कई उपाय किया था, जिसका असर अब घरेलू कीमतों में दिख रहा है.