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पेंशनधारकों ने इस योजना के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये करने और इसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग की है. (फाइल फोटो)
1 फरवरी को केंद्र की बीजेपी (BJP) सरकार का अंतरिम बजट आने से पहले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ईपीएस- 95 (EPS-95) योजना के पेंशनधारकों ने इस योजना के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये करने और इसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग की है.
अखिल भारतीय ईपीएस-95 पेंशनर्स संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने कहा है कि ईपीएस-95 के सदस्यों और उनकी पत्नी को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिये. 20 साल तक काम करने वाले पेंशनर्स को नियमानुसार 2 साल का अतिरिक्त लाभ (वेटेज) दिया जाए और ईपीएस की सदस्यता में बढ़ोतरी की जाए.
ईपीएस-95 पेंशनर्स संघर्ष समिति के अनुसार इस योजना के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7500 रुपये होनी चाहिये और पेंशन को महंगाई भत्ते से जोड़ा जाना चाहिये.
समिति की विज्ञप्ति में राउत के हवाले से कहा गया है कि केंद्र के पास इस योजना के तहत 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक कोष जमा है. सरकार इस राशि पर ब्याज कमा रही है जबकि पेंशनरों को उनका वाजिब हक नहीं दिया जा रहा है.
अपनी मांगों के समर्थन में ईपीएस-95 के बुज़ुर्ग पेंशनर्स ने केन्द्रीय श्रम मंत्री श्री संतोष कुमार गंगवार के दिल्ली और बरेली स्थित आवास के सामने धरना प्रदर्शन किया. राउत ने कहा कि श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने पिछले साल हमारी मांगों को पूरा करने का ठोस आश्वासन दिया था लेकिन उन्होंने अपना वादा नहीं निभाया.
उन्होंने कहा कि करीब 60 लाख पेंशनर्स में से 40 लाख को 1500 रुपये महीने से भी कम पेंशन मिल रही है जबकि कोशियारी समिति की सिफारिशों के अनुसार इसे कम से कम 7,500 रुपये मासिक किया जाना चाहिए और उस पर 5,000 रुपये महंगाई भत्ता होना चाहिए.