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Bal Thackrey
Bal Thackrey Birthday: बाल ठाकरे (Bal Thackrey) का जन्म 23 जनवरी 1926 को पुणे (Pune, Maharashtra) में हुआ था. वे महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध राजनेता (Politician) थे. बाल ठाकरे ने शिव सेना (Shiv Sena) के नाम से एक मराठीवादी दाल का गठन किया था. लोग उन्हें बालासाहेब ठाकरे के नाम से जानते थे. एक समय में मुंबई पर राज करने वाले शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है. लेकिन आज उनके जन्मदिन पर कुछ ऐसी बातें जानते हैं, जो आम जनता के सामने नहीं आ पाई हैं.
बाल ठाकरे ने करियर की शुरुआत कार्टूनिस्ट (Cartoonist) के तौर पर की थी. कार्टूनिस्ट बाल ठाकरे अपने संगठन शिवसेना का मुखपत्र ‘सामना’ (Saamna) मराठी में पब्लिश करते थे. ये मुखपत्र आज तक पब्लिश होता है. 1947 में फ्री प्रेस जर्नल (Free Press Journal) में बाल ठाकरे और मशहूर कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण (R K Lkshman) एक साथ काम किया करते थे.
बाल ठाकरे का फिल्म जगत से करीबी रिश्ता था. संजय दत्त (Sanjay Dutt) से दिलीप कुमार (Dilip Kumar) तक उनकी सबसे जान पहचान थी. कहा जाता है कि जब संजय दत्त टाडा (TADA) के दौरान मुश्किल में घिरे थे, तब बाल ठाकरे ने उनकी हर संभव मदद की थी. बाल ठाकरे ने मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार यानि युसूफ खान के बारे में कहा था कि- “दिलीप साहब मेरे साथ शाम की बैठक लगाया करते थे, लेकिन बाद में पता नहीं क्या हुआ कि वो मुझसे दूर हो गए.”
साल 1996 में पॉप स्टार माइकल जैक्सन (Pop Star Micheal Jackson) भारत आने वाले थे. इस वजह से देश में कई जगह उनका भारी विरोध हो रहा था. ऐसे में कलाप्रेमी बाल ठाकरे खुलकर माइकल जैक्सन के समर्थन में सामने आए थे और विरोधियों को शांत कराया था.
बाल ठाकरे के पिता केशव ठाकरे (Keshav Thackery) का मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी (Mumbai- Finacial Capital) बनाने में बहुत बड़ा हाथ रहा हैं. केशव ठाकरे एक सामाजिक कार्यकर्त्ता थे. उन्होंने साल 1950 में सयुंक्त महाराष्ट्र अभियान चलाया था. वे चाहते थे कि बंबई (मुंबई) को भारत की राजधानी बना दिया जाए. वो इसके लिए पूरा प्रयास कर रहे थे. उनके प्रयासों से भले ही मुंबई देश की राजधानी न बन सकी हो, लेकिन देश की आर्थिक राजधानी जरूर बन गई थी.
17 नवंबर 2012 को बाला साहेब ठाकरे का निधन मुंबई में हुआ. उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क (Shivaji Park, Mumbai) में किया गया. मुंबई के लोग बाला साहेब को ‘टाइगर ऑफ़ मराठा’ (Tiger of Maratha) के नाम से भी जानते थे. वे पहले ऐसे इंसान थे जिनके निधन पर मुंबई के लोगों ने बिना किसी नोटिस के अपनी मर्जी से बंद (Strike) रखा था.
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