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इस प्रोजेक्ट को मुंबई सेंट्रल (Mumbai Central) और बांद्रा (Bandra) टर्मिनस पर शुरू किया गया है. (Dna)
इंडियन रेलवे (Indian Railways) ने जनरल डिब्बों के लिए बॉयोमेट्रिक सिस्टम की शुरुआत की है. रेलवे ने यह कदम जनरल क्लास (General Class) के यात्री को गारंटीड सीट दिलाने के लिए उठाया है. ये ऐसे कोच हैं, जो अनारक्षित (Unreserved) होते हैं. इनमें पहले आओ, पहले पाओ (First Come, First Serve) के आधार पर यात्री को सीट मिलती है. इस प्रोजेक्ट को फिलहाल वेस्टर्न रेलवे (Western Railway) के मुंबई सेंट्रल (Mumbai Central) रेलवे स्टेशन और बांद्रा (Bandra) टर्मिनस पर शुरू किया गया है.
बायोमेट्रिक टोकन सिस्टम
वेस्टर्न रेलवे के CPRO रवींद्र भाकर ने बताया की ये बायोमेट्रिक टोकन सिस्टम है. इसको इस लिए लगाया गया है कि सीट को लेकर कोई मनमानी न कर सके. जनरल कोच के लिए यह व्यवस्था की गई है. कोच में सीट भरने के बाद भी किसी यात्री को चढ़ने से रोका नहीं जाएगा. बॉयोमेट्रिक टोकन के लिए 4 मशीनें लगाई गई हैं. बाकी 4 अहमदाबाद डिविजन के सूरत स्टेशन पर लगेगी.
सीट बेच नहीं पाएंगे दलाल
यह सिस्टम यात्रियों को व्यवस्थित तरीके से बिठाने और जनरल कोच में सीट पर कब्जा कर बेचने वालों पर लगाम लगाने के लिए बनाया गया है. क्योंकि रेलवे को शिकायत मिली थी कि कुछ अराजक तत्व विशेष ट्रेनों में जनरल डिब्बे की सीट बेचने का रैकेट चला रहे हैं. वे पहले सीट पर कब्जा कर लेते हैं और फिर उसे यात्रियों को देने के एवज में मोटी रकम ऐंठते हैं.
कैसे काम करेगा सिस्टम
अब जब कोई यात्री जनरल डिब्बे का टिकट खरीदेगा तो उसे पहले फिंगरप्रिंट स्कैन कराना होगा. इसके बाद 1 टोकन जनरेट होगा. रेलवे उतने ही टोकन जारी करेगा, जितनी कोच में सीटें होंगी.
लाइन से चढ़ेंगे यात्री
इसके बाद ट्रेन छूटने से पहले जनरल डिब्बे के यात्रियों की अलग से लाइन लगेगी. यह लाइन टोकन संख्या के सीरीयल के आधार पर होगी. RPF के लोग टोकन संख्या वेरिफाई करने के बाद यात्री को ट्रेन में बैठने देंगे.
इन ट्रेनों में हुई शुरुआत