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पहली बार 10 लाख ऐसे किसानों को फसली ऋण मुहैया करवाया जाएगा, जो कई सालों से सहकारिता से जुड़े हुए हैं और उन्हें फसली ऋण नहीं मिल पाता था. (फाइल फोटो)
राजस्थान के किसानों के लिए अच्छी और बुरी खबर एक साथ आई है. अच्छी खबर ये कि नए माली साल में 10 लाख नए और ईमानदार किसानों को कर्ज मिलेगा. बुरी खबर ये कि लाखों डिफाल्टर्स किसानों को अब कभी ऋण नहीं मिल पाएगा. बल्कि इनकी जगह नए किसानों का प्राथमिकता दी जाएगी. पहली बार 10 लाख ऐसे किसानों को फसली ऋण मुहैया करवाया जाएगा, जो कई सालों से सहकारिता से जुड़े हुए हैं और उन्हें फसली ऋण नहीं मिल पाता था. कुल मिलाकर ईमानदार किसानों को ही कर्ज मिल पाएगा.
कर्ज की बात आते ही सबसे पहले उन किसानों का दर्द झलकता था जिन्हें दिनरात मेहनत करने के बावजूद भी कर्ज नहीं मिल पाता था. ऐसे किसान जो ईमानदारी से मेहनत मजदूरी तो करते थे, लेकिन उन्हें कभी कर्ज नहीं मिल पाता था. दूसरी तरफ उन किसानों को आसानी से ऋण जाता था जो डिफाल्टर होने के बावजूद भी कर्ज की बहती गंगा में अपने हाथ धो लिया करते थे.
रजिस्ट्रार सहकारिता डॉ नीरज कुमार पवन ने इस संबंध में एक सर्कुलर जारी किया है. इस सर्कूलर में सहकारी बैंकों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि वे विलफुल डिफाल्टर यानी आदतन अवधिपार ऐसे किसानों को फिर से फसली ऋण नहीं दें जो कि जानबूझकर ऋण का चुकान नहीं करते हैं. इन किसानों की जगह नए सहकारी सदस्य किसानों को ऋण उपलब्ध करवाया जाए.
इसके साथ ही ऋणमाफी में सामने आई गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए भी सहकारिता विभाग ने ऋणमाफी की प्रक्रिया को डीएमआर के जरिए आधार से जोड़ते हुए ही ऋण दिए जाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए भी कहा गया है.
पिछली सरकार के समय की गई ऋणमाफी में कई तरह की गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं. इसलिए सरकारी सदस्यों के साथ ही अपात्र और गलत तरीके से भी ऋणमाफी का लाभ लेने के मामले सामने आने के बाद सहकारिता विभाग ने अब इससे बचने के लिए संपूर्ण प्रक्रिया को आधार से जोड़ने के निर्देश दिए हैं.
ऋण वितरण रजिस्ट्रार नीरज कुमार पवन की ओर से जारी सर्कुलर में बैंकों से कहा गया है कि किसानों को एक अप्रैल से खरीफ सीजन के लिए अल्पकालीन फसली ऋण दिया जाना है. ऐसे में केंद्रीय सहकारी बैंक अपने उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर ऋण वितरण के आवंटन निर्धारित करें. बैंकों से कहा गया है कि वे फिलहाल अपने वित्तीय स्त्रोतों से ही ऋण वितरण की व्यवस्था करें. लेकिन सबसे बडी बात ये है कि भारी भरकम वित्तिय भार के बाद किसानों का कर्ज कैसे माफ हो पाएगा.
(जयपुर से आशीष चौहान की रिपोर्ट)