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Lumpy Virus Disease: 2 साल पहले दुनिया में कोरोना महामारी ने दस्तक दी, जिसकी वजह से लाखों लोगों मृत्यु हुई. कोरोना महामारी का इलाज हुआ, वैक्सीन बनी तो थोड़ी राहत मिली लेकिन पिछले कुछ महीनों से मंकीपॉक्स ने भी संक्रमण का डर पैदा कर दिया है और एक बार फिर लोगों के लिए मास्क लगाना और दूरी बनाकर रखना जरूरी हो गया है. लेकिन कोरोना और मंकीपॉक्स (Corona and Monkeypox) के बाद लंपी वायरस (Lumpy Virus) नाम की बीमारी फैल रही है. हालांकि ये बीमारी अभी तक गायों-भैंस के बीच ही फैली है. राजस्थान, गुजरात समेत 10 राज्यों में गाय-भैंसों में जानलेवा लंपी वायरस फैलने की खबरें हैं. ये बीमारी जानलेवा इसलिए है क्योंकि सरकार के सर्वे में अभी तक इस बीमारी से 4296 गौवंश की मौत हो चुकी है.
दुधारू मवेशियों में फैल रहे इस बीमारी को 'गांठदार त्वचा रोग वायरस' यानी LSDV कहा जाता है. इस बीमारी की तीन प्रजातियां हैं. पहली 'कैप्रिपॉक्स वायरस', दूसरी गोटपॉक्स (Goatpox) वायरस और तीसरी शीपपॉक्स (SheepPox) वायरस.
AIIMS के मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. पीयूष रंजन का कहना है कि लंपी त्वचा रोग एक ऐसी बीमारी है जो मच्छरों, मक्खियों, जूं एवं ततैयों की वजह से फैल सकती है. मवेशियों के एक दूसरे के संपर्क में आने और दूषित भोजन एवं पानी के जरिए भी ये दूसरे जानवरों में फैल सकती है.
ये वायरस काफी तेजी से फैलने वाला वायरस है. चूंकि ये रोग दुधारु पशुओं में पाया जा रहा है. लोगों को डर है कि कही उनमें भी इसका असर न हो जाए।. हालांकि, एम्स के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर पीयूष रंजन के मुताबिक इंसानों पर इसका कोई खतरा नहीं है.
इस बीमारी के खिलाफ इंसानों में जन्मजात इम्युनिटी पाई जाती है, यानी ये उन बीमारियों में से है जो इंसानों को हो ही नहीं सकती. हालांकि हम इंसानों के लिए परेशानी की बात ये है कि भारत में दूध की कमी हो सकती है, क्योंकि गुजरात में मवेशियों की जान जाने से अमूल के प्लांट में दूध की कमी हो गई है.
ये बीमारी सबसे पहले 1929 में अफ्रीका में पाई गई थी. पिछले कुछ सालों में ये बीमारी कई देशों के पशुओं में फैली।. साल 2015 में तुर्की और ग्रीस और 2016 में रूस में फैली. जुलाई 2019 में इस वायरस का कहर बांग्लादेश में देखा गया. अब ये कई एशियाई देशों में फैल रहा है. भारत में ये बीमारी 2019 में पश्चिम बंगाल में देखी गई थी.
संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक, लंपी वायरस साल 2019 से अब तक सात एशियाई देशों में फैल चुकी है. साल 2019 में भारत के अलावा चीन, जून 2020 में नेपाल, जुलाई 2020 में ताइवान और भूटान, अक्टूबर 2020 में वियतनाम और नंवबर 2020 में हांगकांग में ये बीमारी पहली बार सामने आई थी.
लंपी को विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने अधिसूचित बीमारी घोषित किया हुआ है. इस वायरस का अभी तक कोई टीका नहीं बना है, इसलिए लक्षणों के आधार पर दवा दी जाती है. मौत से बचने के लिए जानवरों को एंटीबायोटिक्स, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी-हिस्टामिनिक जैसी दवाएं दी जाती हैं.
गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, और जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग जिलों में लाखों मवेशियों को लंपी वायरस अपनी चपेट में ले चुका है.
सबसे ज्यादा खराब स्थिति गुजरात और राजस्थान की है. गुजरात में लंपी वायरस से अबतक 1600 से ज्यादा मवेशियों की मौत हो चुकी है. वहीं, राजस्थान में करीब 4300 गौवंश की मौत रिकॉर्ड की गई है. ऐसा भी माना जाता है कि देश के कई राज्यों के कोहराम मचा रहा लंपी वायरस पाकिस्तान के रास्ते भारत आया है. लम्पी नामक ये संक्रामक रोग इस साल अप्रैल में पाकिस्तान के रास्ते भारत आया था.