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चंद्रयान-3 के लैंडिंग का वक्त बुधवार की शाम 6:04 बजे तय है. (Zeebiz)
Congratulations IRSO for Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 का मून मिशन पूरा हो गया है. अंतरिक्ष में परचम लहरा चुका है. चांद से खुशखबरी आ गई है. लैंडर विक्रम ने दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैंड कर लिया है. पहला संदेश भी भेज दिया है. चांद पर लैंडिंग के बाद अब चंद्रयान-3 के लैंडर 'विक्रम' और रोवर 'प्रज्ञान' 14 दिन तक बिजी रहेंगे. लेकिन, कईं सवाल हैं जो शायद ज्यादातर लोगों के जहन में होंगे, लैंडिंग के बाद रोवर प्रज्ञान तो मून वॉक पर निकल जाएगा. लेकिन, उसे चांद तक पहुंचाने वाला विक्रम क्या करेगा? उसका क्या होगा? क्या उसका इतना ही काम था?
चंद्रयान-3 के लैंडिंग का वक्त बुधवार की शाम 6:04 बजे तय था, जो बिल्कुल तय समय पर हुआ. चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग ISRO के मिशन का आधा हिस्सा है. असली काम तो अब शुरू होगा. लैंडर 'विक्रम' और रोवर 'प्रज्ञान' दोनों अपने काम में जुट जाएंगे. विक्रम के पेट से निकलकर प्रज्ञान चांद पर टहलने निकल जाएगा. पहले ये जान लीजिए कि लैंडर और रोवर दोनों मिशन के लिए क्यों जरूरी हैं.
मून पर लैंड करना ही मकसद नहीं था. वहां से डेटा इकट्ठा करना भी काफी जरूरी है. लैंडर और रोवर के पास सिर्फ 14 दिन हैं. लेकिन, एक बात समझ नहीं आई आखिर 14 दिन ही क्यों? क्योंकि, इतने दिन ही चांद पर दिन रहेगा उसके बाद रात होनी शुरू हो जाएगी. ये वहां का एक दिन है. लैंडर और रोवर दोनों सोलर पावर से काम करते हैं. इसके लिए उन्हें दिन की रोशनी में भी सारा डेटा इकट्ठा करना होगा.

दरअसल, असली काम लैंडर का ही है. लेकिन, वो जहां लैंड करेगा, वहां से हिलेगा नहीं. रोवर 'प्रज्ञान' लैंडर 'विक्रम' से अलग होकर आगे की तरफ बढ़ेगा. जहां-जहां से वो गुजरेगा डेटा इकट्ठा करके लैंडर को ही बताएगा. मतलब दोनों आपस में बात करेंगे. इसके बाद 'विक्रम' ही सारा डेटा धरती (ISRO) को भेजेगा.
चांद पर लैंड करते ही 'विक्रम' थोड़ा इंतजार करेगा. धूल छंटने का इंतजार. इसके बाद अपने पेट को खोलकर एक रैंप बनाएगा. इस रैंप से छह पहियों वाला 'प्रज्ञान' बाहर आएगा. बता दें, लैंडिंग के करीब चार घंटे बाद रोवर बाहर आएगा. रोवर की स्पीड भी कंट्रोल्ड होगी, ताकि वो झटके खाकर गिर न पड़े. 1 सेंटीमीटर प्रति सेकेंड की स्पीड से प्रज्ञान उतरेगा और नेविगेशन कैमरा की मदद से आगे के सफर के लिए जगह तलाशेगा.
'विक्रम' से अलग होने के बाद 'प्रज्ञान' ही आगे जाएगा. जैसे-जैसे रोवर आगे बढ़ेगा वो भारत का राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ और ISRO के लोगो की छाप छोड़ेगा. रोवर के पेलोड्स में लगे इंस्ट्रूमेंट्स चांद से इकट्ठा होने वाला डेटा जैसे- चांद का वातावरण, पानी, खनीज की जानकारी लैंडर को भेजेगा. लैंडर में 3 पेलोड्स हैं. ये पोलेड्स चांद के क्रस्ट और मैंटल स्ट्रक्चर का पता लगाएंगे. इसके अलावा घनत्व, तापमान, भूकंप आते हैं या नहीं इसकी भी जानकारी इकट्ठा करेगा.
चांद पर उतरने के बाद रोवर 'प्रज्ञान' कितना चलेगा? अभी ये सवाल ही है. क्योंकि, रोवर कितनी दूरी तय कर पाता है. उस राह में कितने रोड़े हैं, ये वक्त आने पर ही पता चलेगा. इसका अनुमान अभी लगाना संभव नहीं है. ये सारी कैलकुलेशन वहां की स्थिति के हिसाब से तय होंगी.
चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर को सिर्फ दिन ही क्यों काम करेंगे. क्योंकि, इसके बाद रात होने पर वो कुछ नहीं कर पाएंगे. दरअसल, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तापमान माइनस 238 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है. इतने कम टेम्प्रेचर पर मशीनें काम नहीं करतीं. हालांकि, संभावना जताई गई है 28 दिन बाद फिर से रोवर और लैंडर चांद पर एक्टिव हो जाएं. लेकिन, ये तभी पता चलेगा.
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