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Union Budget 2024: 1 फरवरी को पेश होने वाला बजट लेखानुदान यानि वोट-ऑन-अकाउंट (Vote on Account) होगा. इसमें कोई बड़े ऐलान नहीं होंगे. चुनावी साल है तो अंतरिम बजट पेश होना था. लेकिन, अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने खुद साफ कर दिया कि बजट में कोई बहुत बड़े ऐलान नहीं होंगे. ये सिर्फ वोट-ऑन-अकाउंट बजट होगा. लोकसभा चुनाव होने के बाद नई सरकार बनने पर पूर्ण बजट पेश होगा. तब तक बड़े ऐलान के लिए इंतजार करना होगा.
वित्तमंत्री निर्मला सीतरमण ने साफ कर दिया है कि 1 फरवरी 2024 को वह बजट पेश करेंगी. लेकिन, इसका पूरा फोकस वोट-ऑन-अकाउंट पर होगा. हालांकि, बहुत बड़े ऐलान नहीं होंगे. इसके लिए लोकसभा चुनाव होने का इंतजार करना होगा. निर्मला सीतारमण गुरुवार को उद्योग चैंबर CII के एक कार्यक्रम में पहुंची थीं, जहां उन्होंने ये बात कही. वित्तमंत्री के इस बयान के बाद से कयास लगाए जाने लगे हैं कि इनकम टैक्स में कोई ठोस बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. 2024 में लोकसभा चुनावों के बाद जो नई सरकार बनेगी, वह जून या जुलाई में पूर्ण बजट पेश करेगी. उसमें सेक्टर या मंत्रालयों के लिए एलोकेशंस होंगे.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार हो सकता है चुनाव के बाद जब एक बार फिर सत्ता में आए तो वित्त वर्ष 2024-25 के यूनियन बजट में इनकम टैक्स के नियमों में बदलाव करे. साल 2109 में भी लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने अंतरिम बजट पेश किया था. उस वक्त केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया था. 2019 के चुनावों में जीत के बाद केंद्र में दोबारा नरेंद्र मोदी सरकार बनी और 5 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए पूर्ण बजट पेश किया.
वोट-ऑन-अकाउंट और अंतरिम बजट में थोड़ा अंतर होता है. वोट-ऑन-अकाउंट में केवल सरकार के बजट का खर्च होता है, जबकि अंतरिम बजट में खातों का एक पूरा सेट होता है यानी इसमें खर्च और रसीद दोनों शामिल होते हैं. हालांकि, 2019 के अंतरिम बजट में पीयूष गोयल ने कई बड़े ऐलान किए थे. उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का ऐलान किया था. इसके तहत 2 हेक्टेयर तक जमीन वाले किसानों को हर साल सरकार 6,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है. साथ ही इनकम टैक्स के नियमों में बदलाव का भी ऐलान किया गया था. तब 5 लाख रुपए तक की इनकम पर सरकार ने स्पेशल रिबेट दिया था, जिससे टैक्स का बोझ जीरो हो गया था. इसके अलावा स्टैंडर्ड डिडक्शन को सालाना 40,000 रुपए से बढ़ाकर सालाना 50,000 रुपए किया गया था.
वोट-ऑन-अकाउंट को हिंदी में लेखानुदान कहते हैं. इसका प्रावधान संविधान के आर्टिकल 116 में शामिल है. इसमें सरकार को अपने जरूरी खर्चों के लिए कंसॉलिडिटेड फंड के इस्तेमाल की इजाजत मिलती है. इसका मतलब है कि सरकार वोट-ऑन-अकाउंट के जरिए संसद में यह प्रस्ताव पेश करती है कि जब तक नई सरकार पूर्ण बजट पेश कर उसे संसद से पारित नहीं करा लेती मौजूदा सरकार अपने खर्च के लिए कंसॉलिडेटेड फंड का इस्तेमाल कर सकती है. आम तौर पर यह समय दो महीने का होता है. लेकिन चुनाव की प्रक्रिया को ध्यान में रख नए वित्त वर्ष के चार महीनों के खर्च के लिए संसद की मंजूरी हासिल करती है.