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Budget 2023: देश में 1 फरवरी, 2023 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) अपना पांचवा बजट (Union Budget 2023) पेश करने जा रही हैं. बजट में क्या आ रहा है, इसके साथ ही हमें इसकी उत्सुकता भी रहती है बजट कितना लंबा है, कितने शब्द हैं. वित्त मंत्री ने कितनी देर तक बोला. अगर हम इस लिहाज़ से पुराने बजट को देखें तो बजट भाषण की कई दिलचस्प बातें निकलकर सामने आती हैं. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के नाम देश का सबसे लंबा बजट (the longest budget) पेश करने का रिकॉर्ड दर्ज है, लेकिन क्या आपको पता है कि अब तक का सबसे छोटा बजट भाषण (the shortest budget) किसने दिया था? आइए बजट भाषण की कुछ ऐसी ही दिलचस्प बातें (Budget Trivia) जानते हैं.
साल 1977 में तत्कालीन वित्त मंत्री हीरूभाई मुलजीभाई पटेल ने देश का सबसे छोटा बजट पेश किया था. वो अंतरिम बजट था. इसे 28 मार्च, 1977 को पेश किया गया था. उस साल बजट भाषण 800 शब्दों जितना ही बड़ा था. यह बजट कितना छोटा था, इसका अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि पिछले कुछ सालों में पेश किए गए बजट में 18,000 से ज्यादा शब्द रहे हैं.
देश का सबसे लंबा भाषण देने का रिकॉर्ड मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम दर्ज है. उन्होंने 2020 में 2 घंटे 42 मिनट तक लगातार बोला था. इसके साथ ही उन्होंने 2019 का अपना रिकॉर्ड तोड़ दिया था. वो भी तब जब आखिर के पेज उन्होंने नहीं पढ़े क्योंकि वो अच्छा महसूस नहीं कर रही थीं. 2019 के अपने बजट भाषण में उन्होंने 2 घंटे 17 मिनट लंबा भाषण दिया था.
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अगर शब्दों के लिहाज से देखें तो पूर्व प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री मनमोहन सिंह के नाम सबसे ज्यादा शब्दों वाला बजट भाषण देने का रिकॉर्ड दर्ज है. 1991 में नरसिंहा राव के कार्यकाल में वित्त मंत्री थे, उन्होंने इस दौरान 18,650 शब्दों का भाषण दिया था. इसी लिस्ट में अरुण जेटली का नाम भी जुड़ता है. उन्होंने 2018 में 18,604 शब्दों में बजट भाषण दिया था. उनका भाषण 1 घंटे 49 मिनट लंबा था.
पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम केंद्रीय बजट पेश करने का रिकॉर्ड दर्ज है. 1962-69 में बतौर वित्तमंत्री के कार्यकाल में उन्होंने 10 बजट पेश किए थे. इसके बाद पी चिदंबरम का नंबर आता है, जिन्होंने 9, प्रणब मुखर्जी ने 8, यशवंत सिन्हा ने 8 और मनमोहन सिंह ने 6 बजट पेश किए हैं.
क्या आपको ये पता है कि एक वक्त था जब देश का बजट सुबह में नहीं शाम में पेश किया जाता था. अंग्रेजों के जमाने से ही यह चलन था कि बजट फरवरी महीने के आखिरी वर्किंग डे पर शाम 5 बजे बजट पेश होता था, लेकिन 1999 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट के टाइम को सुबह 11 बजे किया. और फिर 2017 में अरुण जेटली ने बजट के दिन को बदल दिया. फरवरी के आखिरी वर्किंग डे से इसे फरवरी के पहले दिन यानी 1 फरवरी कर दिया गया.
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