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दिवंगत राकेश झुनझुनवाला की कंपनी अकासा एयरलाइन ने अपने पायलटों के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में केस कर दिया है. दरअसल, अकासा के 43 पायलटों ने दूसरी एयरलाइन में काम करने के लिए बिना किसी नोटिस पीरियड के अपनी नौकरी छोड़ दी थी. नौकरी छोड़ने वालों का नोटिस पीरियड 6 महीने का था, जिसे उन्होंने सर्व नहीं किया था. पायलटों के इस्तीफे से एयरलाइन को भारी नुकसान झेलना पड़ा. अब कंपनी ने हर पायलट से अपने नुकसान की भरपाई के लिए करोड़ों रुपये के मुआवजे की मांग की है.
पायलटों की इस अचानक विदाई ने पिछले महीने अगस्त में अकासा एयरलाइन को कई उड़ानें रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा था. यहां तक कि एयरलाइन का कैंसिलेशन दोगुना हो गया था. इसके कारण अकासा एयरलाइन स्पाइसजेट से पिछड़ गई, जबकि जून में इसकी रैंकिंग स्पाइसजेट से ऊपर थी.
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के मुताबिक अकासा फ्लाइट का कैंसिलेशन रेट केवल 0.45 फीसदी था लेकिन अगस्त में ये बढ़कर 1.17 फीसदी तक पहुंच गया. पायलटों के इस इस्तीफे से एयरलाइन के साथ-साथ कस्टमर को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी.
एयरलाइन के प्रवक्ता ने बताया, "हमने केवल उन पायलटों के एक छोटे समूह के खिलाफ कानूनी मांग की है, जिन्होंने अपना कर्तव्य नहीं निभाया और अपना नोटिस पीरियड पूरा किए बिना ही चले गए. यह न केवल उनके नोटिस का उल्लंघन था, बल्कि देश के नागरिक उड्डयन नियमों का भी उल्लंघन था."
प्रवक्ता ने आगे कहा, "उन्होंने न केवल कानून तोड़ा है, बल्कि देश के सिविल एविएशन रूल को भी तोड़ा है. जिसकी वजह से अगस्त में उड़ानों को रद्द किया और आखिरी मिनट में उड़ानों को रद्द करना पड़ा, जिससे हजारों ग्राहक फंस गए और यात्रा करने वाले लोगों को काफी असुविधा हुई.
प्रवक्ता ने कहा, "सौभाग्य से अब हालत संभली है. कड़ी मेहनत के लिए एंप्लोयज को धन्यवाद. एक नए स्टार्ट अप के रूप में हमें इस बात पर गर्व है कि हर अकासियन ने हमारे ऑपरेशन पहले साल से ही हमारी मदद की है." इसलिए, कुछ कर्मचारियों द्वारा इस तरह का व्यवहार न केवल गैरकानूनी और अनैतिक है, बल्कि हमारी पूरी टीम की कड़ी मेहनत के प्रति भी अपमानजनक है, जो हर दिन पूरी ईमानदारी के साथ काम करती है."
आपको बता दें कि इन पायलटों ने अकासा एयरलाइन छोड़ कर टाटा एयरलाइंस को ज्वाइन किया है.
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