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Auto Loans, Passengers Vehicles Sales: भारतीय रिजर्व बैंक यदि आगे चलकर प्रमुख नीतिगत दर रेपो में कटौती नहीं करता है, तो वाहन कर्ज और महंगा हो सकता है, जिसका सीधा असर यात्री वाहनों (पीवी) की बिक्री पर पड़ेगा. मारुति सुजुकी इंडिया के सीनियर एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (मार्केटिंग और सेल्स) शशांक श्रीवास्तव ने यह बात कही है. उन्होंने कहा कि इस साल उद्योग सिंगल डिजिट ग्रोथ के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि 2023 में रिकॉर्ड 41.08 लाख इकाइयों के ऊंचे आधार के चलते यात्री वाहनों की बिक्री वृद्धि एक अंक में रह सकती है.
शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि देश की कुल इकोनॉमिक ग्रोथ एक पॉजीटिव संकेत है. श्रीवास्तव ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘वाहन उद्योग की वृद्धि काफी हद तक कुल अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर निर्भर करती है. प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 6-6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. दोनों के बीच अधिक जुड़ाव होता है. इसलिए यह एक सकारात्मक पक्ष है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम पहुंच ऊंचे ‘आधार’ पर पहुंच गए है. इस आधार पर लगातार वृद्धि हासिल करना कुछ मुश्किल है.'
बकौल शंशाक श्रीवास्तव, 'हमने देखा कि 2021 में वृद्धि लगभग 27 प्रतिशत थी, 2022 में यह 23 प्रतिशत थी. 2023 में यह 8.3 प्रतिशत है. इसलिए मेरा अनुमान है कि इस साल वृद्धि एक अंक में रहेगी.’ श्रीवास्तव ने कहा कि वाहन कर्ज की दरों में संभावित बढ़ोतरी भविष्य की मांग को प्रभावित कर सकती है. पिछले साल से रेपो दर में ढाई प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इस बढ़ोतरी को अभी पूरी तरह खुदरा स्तर पर ट्रांसफर नहीं किया गया है. होम लोन में फ्लोटिंग दरों की वजह से रेपो दर में वृद्धि तुरंत रिटेल लोन दरों में आती है. लेकिन वाहन ऋण के मामले में लगभग 98 प्रतिशत कर्ज निश्चित या फिक्स्ड दरों पर होता है.
शंशाक श्रीवास्तव ने कहा कि अबतक रेपो दर में 2.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी में से 1.3 प्रतिशत खुदरा वाहन कर्ज में आया है. यदि इस साल नीतिगत दर में कटौती नहीं होती है, तो वाहन कर्ज 1.2 प्रतिशत और महंगा हो सकता है. उन्होंने कहा कि ब्याज दर में संभावित वृद्धि के अलावा जो अन्य कारक यात्रा वाहन की बिक्री को प्रभावित कर सकती है, उनमें दबी मांग का समाप्त होना और विनिर्माताओं द्वारा 2023 की समाप्ति से पहले स्टॉक में किया गया ‘करेक्शन’ शामिल है.
उन्होंने कहा कि 2023 की शुरुआत में बड़े स्तर पर लंबित बुकिंग थी. लेकिन साल के दौरान धीरे-धीरे यह कम हो गई है.‘‘ज्यादातर मॉडल के लिए अब ‘वेटिंग पीरियड’ खत्म हो चुका है.’