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घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति तथा आर्थिक वृद्धि की बेहतर संभावनाओं के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अप्रैल के पहले दो सप्ताह में भारतीय शेयर बाजारों में शुद्ध रूप से 13,300 करोड़ रुपए से अधिक डाले हैं. जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, ‘‘आगे चलकर भारत-मॉरीशस कर संधि में बदलावों पर चिंता FPI प्रवाह पर असर डालेगी. यह स्थिति नई संधि के विवरण पर स्पष्टता आने तक बनी रह सकती है.’उन्होंने कहा कि एक और बड़ी चिंता पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है. ईरान-इजराइल के बीच तनाव बढ़ रहा है जिसका असर निकट अवधि में FPI के निवेश पर देखने को मिल सकता है.
उन्होंने कहा कि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) के पास काफी नकदी है. इसके अलावा खुदरा निवेशक तथा उच्च संपदा वाले व्यक्ति यानी HNI भारतीय बाजार को लेकर आशान्वित हैं. ऐसे में FPI की बिकवाली की भरपाई यहां से हो जाएगी. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने इस महीने (12 अप्रैल तक) भारतीय शेयरों में शुद्ध रूप से 13,347 करोड़ रुपए का निवेश किया है. हालांकि, भारत-मॉरीशस कर संधि में बदलाव की आशंका के चलते शुक्रवार को FPI ने 8,027 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी.
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि वृद्धि संबंधी चिंताओं के कारण फिच द्वारा चीन की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग परिदृश्य को स्थिर से घटाकर नकारात्मक करने की वजह से भारतीय बाजारों को भारी निवेश मिला है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा मानसून सामान्य रहने की उम्मीद तथा मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था के बीच वृद्धि तेज रहने की उम्मीद से भी FPI का भारतीय बाजारों को लेकर आकर्षण बढ़ा है.
समीक्षाधीन अवधि में FPI ने शेयरों के अलावा ऋण या बॉन्ड बाजार में 1,522 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया है. जेपी मॉर्गन इंडेक्स में भारत सरकार के बॉन्ड को शामिल किए जाने की घोषणा के बाद से FPI भारतीय बॉन्ड बाजार में पैसा लगा रहे हैं. उन्होंने मार्च में बॉन्ड बाजार में 13,602 करोड़ रुपए, फरवरी में 22,419 करोड़ रुपए और जनवरी में 19,836 करोड़ रुपए का निवेश किया है. कुल मिलाकर, इस साल FPI अबतक शेयरों में कुल 24,241 करोड़ रुपए का निवेश कर चुके हैं. ऋण या बॉन्ड बाजार में उनका निवेश 57,380 करोड़ रुपए रहा है.