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आज के वक्त में देश का युवा स्टार्टअप (Startup) की ओर तेजी से खिंचा जा रहा है. आए दिन कई स्टार्टअप शुरू हो रहे हैं. इनमें से कुछ तो तेजी से आगे बढ़ जा रहे हैं, लेकिन अधिकतर को बहुत संघर्ष झेलना पड़ रहा है. वहीं कुछ ऐसे भी स्टार्टअप हैं जो बंद हो जा रहे हैं. किसी भी स्टार्टअप को शुरू करने में एक अहम बात होती है कि ऑफिस (Startup Office) कैसा लें और कहां लें. ऐसा इसलिए क्योंकि ऑफिस पर एक भारी-भरकम रकम खर्च होती है, जो आपकी लागत का हिस्सा बन जाती है. शुरुआती दौर में बिजनेस नुकसान झेलते हैं, ऐसे में ऑफिस का चुनाव करते वक्त आपको बहुत ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है. आइए हम आपको बताते हैं कुछ तरह के ऑफिस स्पेस के बारे में. आप अपने बिजनेस के हिसाब से उनमें से कोई भी चुन सकते हैं.
किसी भी स्टार्टअप के लिए यह सबसे आसान तरीका होता है ऑफिस लेने का. इसके तहत आपको एक जगह किराए पर मिल जाती है, लेकिन वहां पूरा ऑफिस सेट-अप करने का खर्चा आपको खुद करना होता है. अगर आप बहुत ही शुरुआती दौर में हैं तो कहीं सस्ता सा ऑफिस लेकर अपना काम शुरू कर सकते हैं. हालांकि, इसके तहत आपको कभी भी मकान मालिक ऑफिस खाली करने को बोल सकता है.
अगर आपका बिजनेस चलने लगा है तो आप ऑफिस लीज पर ले सकते हैं. इसके तहत आप लंबे वक्त के लिए ऑफिस स्पेस लेते हैं. यह अवधि 5-10 साल या उससे भी अधिक हो सकती है. इसमें आपको कभी भी अचानक दुकान खाली करने को नहीं कहा जाएगा, लेकिन भले ही आपका फायदा हो या नुकसान, आपको लीज के पैसे तो चुकाने ही पड़ेंगे. वहीं आपको एक ही बार में भारी रकम की जरूरत होगी, जिसे चुकाकर ऑफिस लीज पर लिया जा सके.
जब स्टार्टअप कुछ वक्त तक अच्छे से चल जाए तो आप इस भारी निवेश की तरफ जा सकते हैं. प्रॉपर्टी खरीदना बहुत ही महंगा पड़ता है. वहीं आपका स्टार्टअप किस तरह का है, इस पर ये निर्भर करेगा कि आपको कहां ऑफिस लेना है और जगह के हिसाब से प्रॉपर्टी के दाम कम-ज्यादा होते हैं. अगर मुख्य बाजार में ऑफिस होना जरूरी नहीं है तो बाजार से कहीं दूर ऑफिस लें, ताकि आपका कम खर्चा हो. इसके तहत आपको हर महीने किराया नहीं चुकाना होता, लेकिन एक ही बार भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ती है, जो आपका बजट बिगाड़ सकती है.
अगर आप शुरुआती दौर में हैं तो आपके लिए सबसे अच्छा है कि आप को-वर्किंग स्पेस लें. को-वर्किंग स्पेस में आपको एक ऑफिस की तरह तमाम सुविधाएं मिलती हैं. वहां आपको वाई-फाई मिलेगा, बैठने के लिए कुर्सी और काम करने के लिए प्लेटफॉर्म मिलेगा. कॉफी, चाय, पियून जैसी तमाम सुविधाएं एक को-वर्किंग स्पेस में मिलती हैं. यानी देखा जाए तो आपको एक तरह का छोटा सा ऑफिस ही मिल जाएगा. ऑफिस का एक अलग कल्चर होता है, तो आप पूरी टीम के साथ अच्छे से काम कर सकेंगे.
को-वर्किंग स्पेस में अधिकतर जगह प्रति व्यक्ति के हिसाब से किराया लिया जाता है. नोएडा में यह 8-10 हजार रुपये है तो मुंबई में 10-20 हजार, वहीं बेंगलुरू में यह 10-15 हजार रुपये है. यानी अलग-अलग जगह पर इसका किराया अलग-अलग होता है और साथ ही अलग-अलग तरह के को-वर्किंग स्पेस में ये किराया अलग-अलग होता है.
कोई भी को-वर्किंग स्पेस लेते वक्त यह भी ध्यान रखें कि वहां आने-जाने की सुविधा है या नहीं. पहले से कैल्कुलेट करें कि आपका कितना खर्च आएगा और अगर टीम बढ़ानी होगी तो बढ़ सकेगी या नहीं. सिक्योरिटी को लेकर भी जानकारी पहले ही हासिल कर लें. स्टार्टअप की शुरुआत के लिए को-वर्किंग स्पेस से अच्छा कुछ नहीं हो सकता है.