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आज के समय में महिलाएं भी आदमी के साथ कदम मिलाते हुए इंडिपेंडेंट हो गई हैं. खासकर नौकरीपेशा महिलाओं के लिए फैमिली और करियर को साथ-साथ बैलेंस करना होता है. इसके साथ ही आपको अपना ख्याल रखने और अपने रिटायरमेंट के बारे में भी सोचना चाहिए. आपको अपने फ्यूचर के बारे में ध्यान रखते हुए, अपने फाइनेंशियल सिक्योरिटी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जो महिलाएं हर मायने में फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट होना चाहती हैं, उन्हें अभी से इसके लिए कदम उठाने शुरू कर देने चाहिए. फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए बहुत सारे एफर्ट और स्मार्ट डिसीजन लेने की जरुरत होती है. थोड़ी सी भी गलती आपकी सारी मेहनत को बर्बाद कर सकती है. जिस कारण आप वापस उसी कंडीशन में पहुंच सकती हैं जहां से आपने स्टार्ट किया था. इससे बचने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. क्योंकि आपके एक डिसीजन पर आपका पूरा फ्यूचर डिपेंड करता है. और इसलिए आप जरा भी केयरलेस नहीं हो सकतीं हैं.
भारत में कई महिलाएं पैसा कमाने के बावजूद फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट नहीं हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि वे फाइनेंशियल डिसीजन पूरी तरह से अपने जीवनसाथी पर छोड़ देती हैं. इस कारण उन्हें अपने फाइनेंस और इंवेस्टमेंट को संभालने का कोई एक्सपीरियंस नहीं रहता है. यहां तक की कुछ महिलाएं अपनी पूरी सेलरी अपने पार्टनर को मैनेज करने के लिए भी दे देती हैं. आप अपने पार्टनर पर भरोसा करते हैं ये अच्छी बात है लेकिन अपनी इनकम पूरी तरह से अपने पार्टनर को देने से आखिर में आपके पास कुछ नहीं बचता है. इसलिए महिलाओं को सबसे पहले अपने इंडिविजुअल फाइनेंस का चार्ज खुद लेना शुरू करना चाहिए. फाइनेंस को बेहतर ढंग से समझने के लिए आप अपने पार्टनर के साथ इस पर चर्चा कर सकते हैं या फाइनेंस एक्सपर्ट से भी सलाह ले सकते हैं.
अपने लिए, अपने नवजात बच्चे की देखभाल के लिए या फैमिली में किसी बीमार पर्सन की देखभाल के लिए एक छोटा सा ब्रेक लेने में कोई हर्ज नहीं है. लेकिन इस तरह के ब्रेक से आपके करियर एस्पिरेशन खत्म नहीं होना चाहिए. हमारे समाज में आज भी महिलाओं से अपने फैमिली और बच्चों की खातिर अपनी नौकरी छोड़ने की एक्सपेक्टेशन की जाती है. जो न केवल उनके कॅान्फिडेंस पर असर डालती है बल्कि उनके फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए भी रिस्की हो सकता है.
महिलाएं आदमियों से कई मायनों में अलग हैं, इसमें पैसे को लेकर एप्रोच भी शामिल है. कई महिलाएं पुरुषों की तुलना में रिस्क लेने से ज्यादा डरती हैं. महिलाएं अपना पैसा फिक्स डिपॅाजिट और पीपीएफ (सार्वजनिक भविष्य निधि) जैसे ऑप्शन में लगाती हैं. इन ऑप्शन में इंवेस्ट करने के कारण महिलाएं ज्यादा रिटर्न का चांस खो देती हैं. इसलिए महिलाओं को इक्विटी लिंक्ड इंवेस्टमेंट करना चाहिए. इसके लिए आप म्युअचल फंड में इंवेस्ट कर सकती हैं. इसमें इंवेंस्ट करने से आपको एफडी की तुलना में ज्यादा रिटर्न मिल सकता है.
हमें फ्यूचर में आने वाली सबसे खराब कंडीशन के लिए भी हमेशा तैयार रहना चाहिए. इसलिए महिलाओं को भी इंश्योरेंस पॅालिसी लेनी चाहिए. इससे आपको और फैमिली के लिए कवर मिल जाता है. इसके अलावा महिलाओं को लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस और कार बीमा भी खरीदना चाहिए.
अपने रिटायरमेंट के लिए प्लान बनाने में देरी करना एक बड़ी फाइनेंशियल मिस्टेक हो सकती है. कई पुरुष 40 साल की उम्र के बाद रिटायरमेंट के बारे में सोचना शुरू कर देते हैं और महिलाओं के लिए 'रिटायरमेंट प्लानिंग' उनकी प्रायॅारिटी में नहीं होता है. ऐसे में महिलाएं जैसे ही कमाना शुरू करती हैं उनको अपनी रिटयरमेंट के लिए इंवेस्टमेंट करना शुरू कर देना चाहिए.ऐसा करने से उनके रिटायरमेंट इवेंस्टमेंट को बढ़ाने में समय मिलेगा.
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