कई बार ऐसा होता है कि हमें कोई सामान खरीदना है, लेकिन हमारे पास उतना बजट नहीं है तो लोग ऐसे में उस सामान को खरीदने के लिए क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का इस्तेमाल करते हैं. आज के टाइम में अपनी किसी भी जरूरत या लग्जरी चीज को पूरा करने के लिए क्रेडिट कार्ड एक अच्छा ऑप्शन है, लेकिन कई बार समय पर पेमेंट न करना यूजर्स को काफी भारी पड़ जाता है. इसलिए आज हम आपको बताते हैं कि टाइम से पेमेंट न करने पर आपको कौन-कौन से नुकसान उठाने पड़ सकते हैं.
1/6अगर आप क्रेडिट कार्ड बिल के भुगतान में देरी करते हैं, तो आपसे लेट फीस देनी होती है. ग्राहक समय पर पेमेंट नहीं करता है तो उसको अगले बिलिंग डिटेल में देर या छूटे हुए पेमेंट की अमाउंट भी जुड़कर आती है. इसके साथ ही आपकी लेट फीस चार्ज भी इसमें जोड़ा जाता है. लेट फीस चार्ज हर बैंक का अलग-अलग हो सकता है.
2/6लेट पेमेंट करने पर आपका क्रेडिट स्कोर नीचे गिरता है. आप जितना ज्यादा देरी से पेमेंट करेंगे आपका क्रेडिट स्कोर उतना ही गिरता जाएगा. देर से पेमेंट करना आपके क्रेडिट स्कोर को प्रभावित कर सकता है इसके साथ ही इसका असर लोन लेने और क्रेडिट लेने पर भी पड़ता है. तो इसलिए ग्राहक को समय पर क्रेडिट कार्ड का पेमेंट करना चाहिए.
3/6यदि आप बार बार बिल पेमेंट में देरी करते हैं तो आप किसी भी तरह का रिवॉर्ड पॉइंट का फायदा नहीं ले पाएंगे. ग्राहक को पेमेंट करने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी जाती अगर ग्राहक उस तय टाइम में पेमेंट नहीं करता है तो उस पर लगने वाला ब्याज भी बढ़ता जाता है. ग्राहक पर न केवल लेट फीस लगाई जाती है बल्कि आपकी ब्याज की राशि भी बढ़ाकर लगाई जाती है.
4/6इसके अलावा लेट पेमेंट पर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट भी खराब होती है. यदि आपका पेमेंट करने में 30 दिनों से ज्यादा का समय लेते हैं तो ये आपकी क्रेडिट रिपोर्ट को प्रभावित करता है.
5/6क्रेडिट कार्ड से लोन लेकर सामान खरीदने से आप बैंक की नजर में आ जाते हैं. ऐसे में अगर आप लोन की पेमेंट या फिर ईएमआई का समय पर भुगतान नहीं करते तो बैंक की नजर में आपकी इमेज खराब होती है और वह आपका क्रेडिट प्रोफाइल लगातार कम करता रहता है. इसका लॉन्ग टर्म में आपको नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि जब कभी आप बैंक से लोन लेने जाएंगे तो वह आपके खराब क्रेडिट प्रोफाइल पर लोन देने से मना कर देगा.
6/6इसके अलावा ग्राहक को अपने क्रेडिट कार्ड की लिमिट जानना भी जरूरी है. क्रेडिट कार्ड से खर्च करने की एक लिमिट होती है. ऐसे में हमेशा लिमिट का पता रखें और लिमिट का सिर्फ 30 से 40 फीसदी का ही इस्तेमाल करें. क्योंकि ज्यादा खर्च करने या फिर कई बार ज्यादा ईएमआई बनवा लेने से लिमिट का पता नहीं चलता इसका नुकसान ग्राहक को बाद में उठाना पड़ता है.