देश में इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत वरिष्ठ नागरिकों को कई तरह के इनकम टैक्स बेनेफिट दिए जाते हैं. टैक्स फाइलिंग उनके लिए आसान रहे और जीवन भर की कमाई पर उन्हें बुढ़ापे में आराम मिले, इसके लिए सरकार सीनियर सिटीजंस को टैक्स छूट देती है. हम आपको यहां ऐसे ही सात टैक्स बेनेफिट्स के बारे में बता रहे हैं जो वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी यानी 60 साल से ऊपर की उम्र वाले टैक्सपेयर्स को दी जाती है.
1/8सीनियर सिटीजंस को दोनों ही टैक्स रिजीम में ज्यादा टैक्स एग्जेम्पशन मिली हुई है. दोनों ही रिजीम में 3 लाख तक की आय टैक्स फ्री है, जबकि आम टैक्सपेयर्स के लिए ये लिमिट ढाई लाख की है. सुपर सीनियर सिटीजंस के लिए लिमिट 5 लाख की है.
2/8वरिष्ठ नागरिकों को इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत ये स्पेशल छूट मिली हुई है कि 75 साल और इससे ऊपर के टैक्सपेयर्स को कुछ निश्चित शर्तों के साथ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं है.
3/8पेंशन पाने वाले टैक्सपेयर्स को सरकार 50,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन देती है, वहीं, पारिवारिक पेंशन पाने वालों को 15,000 रुपये की पेंशन मिलती है.
4/8सीनियर सिटीजंस को ब्याज से आय पर ज्यादा छूट मिलती है. जहां आम निवेशक को सालाना 40,000 तक के ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है, वहीं वरिष्ठ नागरिक 50,000 तक के ब्याज पर ये लाभ उठा सकते हैं.
5/8जहां रेगुलर बीमा ग्राहक को हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम भुगतान पर 25,000 तक का टैक्स डिडक्शन मिलता है, वहीं सीनियर सिटीजंस को सरकार 50,000 के प्रीमियम पर टैक्स छूट देती है. ये छूट 80C सेक्शन के तहत मिलती है.
6/8IT Act, 1961 के तहत सेक्शन है 80DDB जिसमें सीनियर सिटीजंस को गंभीर बीमारी के इलाज के खर्चों पर 1 लाख तक की छूट लेने का विकल्प दिया जाता है.
7/8ऐसे सीनियर सिटीजंस जिनकी किसी बिजनेस या प्रोफेशन से लाभ या आय नहीं होती है और उनकी टैक्सेबल इनकम नहीं है तो उन्हें एडवांस टैक्स नहीं भरना होता है.
8/8अगर कोई वरिष्ठ नागरिक अपने किसी आवास को रिवर्स मोर्गेज स्कीम के तहत मासिक आय के लिए उठा देता है, तो प्रॉपर्टी का अधिकार उसी के पास रहेगा, साथ ही हर महीने जो उसे आय मिलेगी, उसपर उसे टैक्स छूट मिलेगी.