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बीते साल Tata Technology, IREDA, IdeaForge Ltd. Utkarsh Small Finance Bank जैसे दमदार IPOs आए, जिन्होंने निवेशकों की जमकर कमाई कराई. रिटेल इन्वेस्टर्स ने बड़ी संख्या में प्राइमरी मार्केट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. आईपीओ की हलचल पूरे साल रही और इस साल कुछ आईपीओ की अप्रत्याशित लिस्टिंग भी हुई है. अब जब इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग का सीजन शुरू हो रहा है तो ऐसे निवेशकों को ये भी सोचने की जरूरत पड़ेगी कि अगर उन्होंने इस बीते वित्त वर्ष में आईपीओ की लिस्टिंग से कमाई की है तो उन्हें इसपर टैक्स भी भरना होगा.
देखिए, भारत में स्टॉक या इक्विटी में निवेश पर हुए लाभ को लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के तहत रखा जाता है, इसके आधार पर ही गेन पर कितना टैक्स लगेगा, ये तय होगा. ये ध्यान रखिए कि जब आप स्टॉक बेचते हैं, उसके हिसाब से आपके ऊपर टैक्स लगता है. 12 महीना या एक साल स्टॉक रखकर बेचने पर इसे लॉन्ग टर्म गेन के तहत रखा जाता है. इसपर अधिकतम 1 लाख रुपये तक पर टैक्स छूट मिलती है. अगर इससे ऊपर का गेन है तो इसपर इन्डेक्सेशन के बिना 10 पर्सेंट टैक्स लगता है. ये लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का नियम हुआ.
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स तब लगता है, जब आपने कोई शेयर 12 महीने या इससे कम अवधि के लिए रखा, तो ये शॉर्ट टर्म गेन में आएगा. इसपर आपको 15%+सेस+सरचार्ज देना होगा.
अगर आपने आईपीओ में पैसे लगाए, लेकिन आपको नुकसान हुआ, या फिर शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस हो गया. तो आप शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को शॉर्ट टर्म/लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के साथ सेटऑफ कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें कि शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को ही सेटऑफ किया जा सकता है, लॉन्ग टर्म को नहीं. आप शॉर्ट टर्म लॉस को अगले आठ सालों के पीरियड के लिए कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं, लेकिन इसे भविष्य में होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के अगेंस्ट ही सेटऑफ किया जा सकता है.
अगर बीते साल आपने भी आईपीओ की लिस्टिंग से पैसे कमाए हैं तो इसे इक्विटी से कमाई के तौर पर देखा जाएगा और आपको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स भरना होगा, जैसाकि हमने आपको ऊपर बताया. कैपिटल गेन से इनकम को टैक्सपेयर्स को ITR-2 और ITR-3 के जरिए रिपोर्ट करना होगा.