टैक्सपेयर को मलाई लेकिन कंडीशन अप्लाई... आखिर कितनी बचत और कितनी कमाई?

सरकार की पूरी कोशिश रही कि हर वर्ग यानी हर इनकम स्लैब में आने वालों को खुश किया जाए. फिर भी, एक हाथ से दिया तो दूसरे हाथ से ले भी लिया. 
टैक्सपेयर को मलाई लेकिन कंडीशन अप्लाई... आखिर कितनी बचत और कितनी कमाई?

इनकम टैक्स स्लैब में कई बदलाव किए गए. पूरा स्लैब सिस्टम को पांच हिस्सों में बांटा गया.

न्यूजीलैंड में टी-20 क्रिकेट सीरीज में लगातार दो सुपर ओवर और टीम इंडिया की धमाकेदार जीत. वहीं, अपने देश में टैक्सपेयर वित्त मंत्री की गुगली पर क्लीन बोल्ड. ऐसा था आज बजट 20-20. टैक्सपेयर्स को वित्त मंत्री ने मलाई तो चटाई, लेकिन उनके निवेश और बचत पर कर दी कंडीशन अप्लाई. समझ नहीं आया? ऐसे ही है इनकम टैक्स का नया स्लैब. टैक्सपेयर्स के लिए ये वही पहेली है- 'बूझो तो जानो'. हालांकि, सरकार की पूरी कोशिश रही कि हर वर्ग यानी हर इनकम स्लैब में आने वालों को खुश किया जाए. फिर भी, एक हाथ से दिया तो दूसरे हाथ से ले भी लिया.

इनकम टैक्स स्लैब में कई बदलाव किए गए. पूरा स्लैब सिस्टम को पांच हिस्सों में बांटा गया. नया ऐलान सुनते ही लगा कि वाह! क्या बात है, बल्ले-बल्ले. लेकिन, यहीं आपकी खुशियों पर शर्त लगा दी गई. नए बदलाव में अब पांच लाख रुपए तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. वहीं, 15 लाख रुपए की आमदनी पर 25 फीसदी टैक्स लगेगा. लेकिन, इस नए टैक्स स्लैब के साथ एक पेच भी जुड़ा हुआ है. आइये समझते हैं...

पहले जानिए आपके लिए क्या बदला?
नए टैक्स स्लैब के मुताबिक, 5 लाख से 7.5 लाख रुपये तक की सालाना आय वालों को अब 20 फीसदी के मुकाबले सिर्फ 10 फीसदी की दर से ही टैक्स चुकाना होगा. वहीं, जिनकी सालाना आय 7.5 लाख रुपये से 10 लाख रुपए तक है, उन्हें सिर्फ 15 फीसदी की दर से ही टैक्स भरना होगा. वित्त मंत्री का कहना है कि इस नए स्लैब में आने से 15 लाख की इनकम करने वालों को सालाना 78000 रुपए का फायदा हो सकता है.

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लेकिन, पेच ये है कि...
इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव शर्तों के साथ किया गया है. नए बदलाव के तहत टैक्स में छूट लेने के लिए आपको निवेश पर मिलने वाली छूट को छोड़ना होगा. मतलब अभी तक आप बीमा, निवेश, मेडिकल, बच्चों की स्कूल फीस, HRA, 80C, 80CCC, 80D जैसे निवेश करके अपनी बचत करते थे और टैक्स छूट का भी फायदा लेते थे. लेकिन, नए स्लैब में ऐसा नहीं होगा. यहां आपकी इनकम पर सीधा टैक्स होगा. अगर छूट चाहिए तो टैक्स की पुरानी दर मान्य होगी. कुल 100 रियायतें में से छांटकर सिर्फ 30 को रखा गया. 70 रियायतों को पूरी खत्म कर दिया गया है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट बलवंत जैन के मुताबिक, नया स्लैब पूरी तरह से वैकल्पिक होगा. अगर किसी टैक्सपेयर को इस नए स्लैब का फायदा लेना है तो उसे उन छूट का त्याग करना होगा, जो अभी तक मिलती आई हैं. अगर आप पहले बीमा, निवेश, घर का किराया, बच्चों की स्कूल फीस, सरकारी निवेश स्कीम जैसी कुल 70 छूट हैं, जिनपर मिलने वाली छूट को त्यागना होगा. अभी तक टैक्स भरते हुए इन सभी चीज़ों की जानकारी देने पर टैक्स में छूट मिलती थी.

Tax Exemptions, Income tax slab changed

तो आखिर टैक्सपेयर करे क्या?
बड़े-बड़े टैक्स एक्सपर्ट भी फिलहाल ये नहीं बता पा रहे हैं कि फायदे का सौदा क्या होगा. पुराने टैक्स ब्रैकेट में बने रहे या नई टैक्स व्यवस्था का हिस्सा बनना. ये जानने के लिए फिलहाल काफी गुणा-गणित करना होगा. दोनों ऑप्शन में ज्यादा बचत कहां हो रही है. नया स्लैब ये साफ इशारा कर रहा है कि सरकार बचत वाली व्यवस्था को बढ़ावा देने के मूड में नहीं है. क्योंकि, PPF, सुकन्या समृद्धि जैसी स्कीम में निवेश करेंगे तो अपने लिए, उस पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी. वित्त मंत्री ने ये ऐलान जरूर किया है कि अगर आप नए टैक्स स्लैब को चुनते हैं तो ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी कि आपको आईटीआर फाइल करने या टैक्स भरने के लिए किसी टैक्स एक्सपर्ट की मदद नहीं लेनी होगी. आपका स्लैब अपने कम्प्यूटर के जरिए फॉर्म में पहले से भरा होगा.

कौन सा विकल्प चुनें?
नए स्‍लैब के तहत 5 लाख से 7.5 लाख तक की इनकम पर 10 फीसदी, 7.5 लाख से 10 लाख तक पर 15 फीसदी, 10 लाख से 12.5 लाख पर 20 फीसदी, 12.5 लाख से ज्यादा 25 फीसदी, 15 लाख से ज्‍यादा 30 फीसदी टैक्‍स देना होगा. वहीं, दूसरे विकल्‍प में आप टैक्‍स की पुरानी व्‍यवस्‍था का चुनाव कर सकते हैं. इसके तहत 5 लाख तक की आय टैक्‍स मुक्‍त रहेगी, लेकिन, सालाना आय इससे ज्‍यादा होते ही 2.5 लाख तक की इनकम पर टैक्‍स नहीं देना होगा. बाकी इनकम पर टैक्‍स बचाने के लिए पहले की तरह निवेश के विकल्‍प मिलते रहेंगे. हालांकि, विकल्‍प चुनने के लिए आपको अपनी कंपनी को बताना होगा.

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अब ऐसा होगा नया टैक्स स्लैब
पहला- 2.5 से 5 लाख रुपए तक की आय पर 5% टैक्स. लेकिन, छूट के साथ 5 लाख तक की आय टैक्स फ्री.
दूसरा- 5 से 7.5 लाख तक की कमाई पर 10% टैक्स.
तीसरा- 7.5 से 10 लाख रुपये तक की कमाई पर 15% टैक्स.
चौथा- 10 से 12.5 लाख तक की कमाई पर 20% टैक्स.
पांचवा- 12.5 से 15 लाख तक की कमाई पर 25% टैक्स.
छठा- 15 लाख और अधिक से ऊपर की कमाई पर 30% टैक्स.

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