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सब्जियों के दामों में बढ़ोतरी नंवबर के 3.91 फीसदी की तुलना में दिसंबर में 31.56 फीसदी हो गई.
WPI December 2021: फूड प्रोडक्ट्स की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद भी ईंधन, ऊर्जा और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में नरमी आने के चलते थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर 2021 में कम होकर 13.56 प्रतिशत हो गई. इससे पहले चार महीने तक महंगाई दर में लगातार बढ़ोतरी का ट्रेंड रहा था. पीटीआई की खबर के मुताबिक, अप्रैल से लगातार नौवें महीने थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति डबल डिजिट में बनी हुई है. पिछले साल नवंबर में मुद्रास्फीति 14.23 प्रतिशत थी जबकि दिसंबर 2020 में यह 1.95 प्रतिशत थी.
खनिज तेलों, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई
खबर के मुताबिक, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि दिसंबर 2021 में मुद्रास्फीति (WPI December 2021) की दर मुख्य रूप से खनिज तेलों, मूल धातुओं, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, रसायन और रासायनिक उत्पादों, खाद्य उत्पादों, कपड़ा, कागज और कागज के उत्पादों आदि की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते इस लेवल पर है. यह पिछले साल इसी महीने की तुलना में ज्यादा है.
विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई
विनिर्मित वस्तुओं की मुद्रास्फीति (manufactured items inflation) दिसंबर में 10.62 प्रतिशत थी जबकि इससे पहले के महीने में यह इससे ज्यादा 11.92 प्रतिशत थी. दिसंबर में ईंधन और बिजली कैटेगरी में मुद्रास्फीति 32.30 प्रतिशत हो गई, जबकि नवंबर में यह 39.81 प्रतिशत थी. खाद्य वस्तुओं में मुद्रास्फीति नवंबर के 4.88 फीसदी के मुकाबले बढ़कर दिसंबर में 9.56 फीसदी हो गई. सब्जियों के दामों में बढ़ोतरी नंवबर के 3.91 फीसदी की तुलना में दिसंबर में 31.56 फीसदी हो गई.
खुदरा महंगाई के तेवर चढ़े
खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर, 2021 में बढ़कर 5.59 प्रतिशत हो गई है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर, 2021 में 4.91 प्रतिशत और दिसंबर, 2020 में 4.59 प्रतिशत थी. केंद्रीय बैंक का मानना है कि बेस इफेक्ट विपरीत होने की वजह से वित्त वर्ष की बची अवधि में मुद्रास्फीति (Retail inflation in december 2021) का आंकड़ा ऊंचा रहेगा.