लॉकडाउन के बीच आप व्हाट्सएप और ई-मेल भेज कर भी अपनी जरूरी दवाओं को घर पर मंगा सकते हैं. भारतीय जन औषधि केंद्रों (PMBJK) ये सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं. केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मूताबिक लॉकडाउन के बीच कई प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र व्हाट्सएप और ई-मेल पर दवा के लिए ऑर्डर स्वीकार कर रहे हैं. लोगों की ओर से वेबसाइट पर जा कर अपलोडेड किए गए प्रस्क्रिप्शनों के आधार पर मरीजों को उनके घर पर दवा उपलब्ध कराई जा रही है.
1/5भारतीय जन औषधि केंद्रों दवाओं को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस सुविधा के लिए केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद देवगौड़ा ने भारतीय जन औषधि केंद्रों को बधाई देते हुए कहा, ‘ यह जानकर खुशी हो रही है कि कई पीएमबीजेके व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सहित आधुनिक संचार माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं जिससे कि जरूरतमंदों को जरूरी दवाएं तुरंत उपलब्ध कराई जा सके.
2/5प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत कई पीएमबीजेके कार्य कर रहे हैं. वर्तमान में देश के 726 जिलों में 6300 से अधिक पीएमबीजेके काम कर रहे हैं जो किफायती दामों पर अच्छी क्वालिटी की दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं. ये दवाएं औसतन 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती हैं. अप्रैल, 2020 में लगभग 52 करोड़ रुपये के बराबर के मूल्य की दवाओं की आपूर्ति पूरे देश भर में की गई है.
3/5दूर दराज के इलाकों में स्थित स्टोरों को आपूर्ति के लिए भारतीय डाक के साथ आपूर्ति प्रबंध किया गया है. इसके अतिरिक्त, केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल्स विभाग के तहत ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयू ऑफ इंडिया (बीपीपीआई) ने कच्चे मालों एवं संभार तंत्र के लिए कार्यशील पूंजी मुद्दों के समाधान के लिए नियत तिथि के भीतर अपने वेंडरों को भुगतान कर दिया है.
4/5लॉकडाउन के कारण आपूर्ति में आने वाली मुश्किलों को दूर करने के लिए प्रत्येक राज्य के लिए बीपीपीआई अधिकारियों की टीम गठित की गई है. इस समय जनऔषधि वेयरहाउस पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं और कर्मचारियों के लिए घर में ही रहने के इंतजाम किए गए हैं. उपभोक्ताओं एवं स्टोर मालिकों के किसी भी मुद्दे के समाधान के लिए बीपीपीआई के हेल्पलाइन नंबर कार्य कर रहे हैं.
5/5लॉकडाउन अवधि के दौरान अनिवार्य दवाओं की आपूर्ति बनाये रखने के लिए बीपीपीआई ने अप्रैल महीने में 186.52 करोड़ रुपये की एमआरपी वाली 178 फास्ट मूविंग दवाओं के लिए खरीद ऑर्डर दिए है.