Published: 2:03 PM, Dec 12, 2024
|Updated: 4:28 PM, Dec 12, 2024
Home Loan लंबे समय का लोन होता है. आजकल ज्यादातर लोग होम लोन लेकर मकान खरीदते हैं. अक्सर होम लोन की रकम बड़ी होती है, ऐसे में EMI भी अच्छी खासी बनती है, जिसे लंबे समय तक चुकाना बोझ जैसा बन जाता है. कई बार हालात ऐसे भी बन जाते हैं कि लोन की ईएमआई मिस हो जाती है. एक या दो EMI मिस हो जाए तो आप किसी तरह से मैनेज कर सकते हैं, लेकिन अगर आपने 3 EMI लगातार मिस कर दीं, तो आप बैंक की रडार पर आ जाएंगे. इसके बाद बैंक आपको डिफॉल्टर घोषित करेगा और आपके खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगा. जानिए फिर क्या होगा आपके साथ.
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EMI मिस होने पर बैंक एकदम से ग्राहक के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेता. ऐसे मामले में बैंक की ओर से पहले समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाती है, ताकि बैंक को ग्राहक की संपत्ति को वापस लेने और नीलाम करने की जरूरत न पड़े. आमतौर पर जब ग्राहक की पहली EMI मिस होती है, तो बैंक उसे बहुत गंभीरता से नहीं लेते हैं क्योंकि वो उसे ग्राहक की चूक मान लेते हैं.
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जब ग्राहक की लगातार दो EMI मिस होती हैं, तब बैंक उसे नोटिस करता है और ग्राहक को ईएमआई भरने के लिए रिमाइंडर भेजता है. अगर संभव हो तो उधारकर्ता को ये नोटिस मिलते ही बैंक के साथ बैठकर जल्दी समाधान निकालना चाहिए.
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जब नोटिस के बावजूद ग्राहक की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जाता और तीसरी किस्त भी मिस हो जाती है तो बैंक लोन अकाउंट को NPA मान लेता है और उधारकर्ता को डिफॉल्टर घोषित कर देता है.
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लोन के NPA बन जाने के बाद भी बैंक एकदम से प्रॉपर्टी की नीलामी नहीं करता. बैंक होम लोन डिफॉल्टर को कानूनी कार्रवाई का नोटिस देता है और फिर उधारकर्ता को छूटी हुई EMI का भुगतान करने के लिए 2 महीने तक का समय देता है. ये डिफॉल्टर के लिए सब कुछ ठीक करने का एक और मौका होता है.
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कानूनी नोटिस मिलने के बाद भी उधारकर्ता की ओर से बैंक को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तब बैंक संपत्ति की नीलामी के लिए आगे बढ़ जाता है.
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नीलामी के मामले में भी बैंक को पब्लिक नोटिस जारी करना पड़ता है. इस नोटिस में असेट का उचित मूल्य, रिजर्व प्राइस, तारीख और नीलामी के समय का भी जिक्र किया जाता है. अगर बॉरोअर को लगता है कि असेट का दाम कम रखा गया है तो वो इस नीलामी को चुनौती दे सकता है.