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(Image: Reuters)
RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन की बैठक सोमवार को शुरू हो गई. माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए कुछ सख्त नीतिगत कदम उठा सकता है. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikanta Das) 8 जून को पॉलिसी का एलान करेंगे. आरबीआई गवर्नर पहले ही संकेत दे चुके हैं कि ब्याज दरों में एक बार फिर बढ़ोतरी की जा सकती है. वहीं, अर्थशास्त्री भी मान रहे हैं कि रेपो रेट में 40-50 बेसिस प्वाइंट और CRR में 25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा हो सकता है. इससे पहले, आरबीआई ने 4 मई को अचानक रेपो दर में 0.40 फीसदी और CRR में आधा फीसदी की बढ़ोतरी कर सबको चौंका दिया था. अगर इस बार भी रेपो रेट बढ़ता है, होम लोन, ऑटो लोन और पसर्नल लोन एक महीने में दूसरी बार महंगा हो जाएगा. साथ ही मौजूदा लोन की EMI भी बढ़ जाएगी. फिलहाल रेपो दर 4.40 फीसदी और CRR 4.50 फीसदी पर है.
Emkay ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की लीड इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा का कहना है कि महंगाई को कंट्रोल करने के लिए रिजर्व बैंक को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है. ऐसा आकलन है कि वित्त वर्ष 2023 तक रेपो रेट 6 फीसदी तक हो सकता है. इस दौरान 1 से 1.25 फीसदी की बढ़ोतरी ब्याज दर में और 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) में देखने को मिल सकती है. अरोड़ा का कहना है कि जून की पॉलिसी में ब्याज दर में 40-50 बेसिस प्वाइंट और सीआरआर में 25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा हो सकता है.
Samco सिक्युरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड येशा शाह के मुताबिक, बाजार का अनुमान है, कि महंगाई को खतरे को देखते हुए रिजर्व बैंक मॉनिटरी पॉलिसी समीक्षा में रेपो रेट में 35-40 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर सकता है.
मार्केट एक्सपर्ट मानते हैं कि महंगाई दर अप्रैल में आठ साल के टॉप पर पहुंच गई. इसके बाद रिजर्व बैंक 8 जून को रेपो दर में 0.40 फीसदी से भी ज्यादा की बढ़ोतरी कर सकता है. आरबीआई (RBI) का मुद्रास्फीति के लिए संतोषजनक स्तर 6 फीसदी का है लेकिन अब यह 8 फीसदी के आसपास पहुंच गई
महंगाई दर में आए जोरदार उछाल की बड़ी वजह कमोडिटी और फ्यूल की दामों में बढ़ोतरी है. खासकर फरवरी के अंत में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से महंगाई में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. WPI आधारित मुद्रास्फीति 13 माह से दहाई अंक में बनी हुई है और अप्रैल, 2022 में यह रिकॉर्ड 15.08 फीसदी पर पहुंच गई. वहीं, CPI आधारित यानी रिटेल महंगाई दर अप्रैल 2022 में 7.79 फीसदी पर रही. यह 8 साल में सबसे ज्यादा है. ऐसे हालात में केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दर बढ़ाने के मोर्चे पर विकल्प बहुत सीमित ही रह गए हैं.