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Wheat Price Hike: त्योहारों से पहले आम आदमी को गेहूं की बढ़ती कीमतों से राहत मिल सकती है. रॉयटर्स के मुताबिक, सरकार गेहूं इम्पोर्ट ड्यूटी (Wheat Import Duty) घटा या हटा सकती है. सरकार गेहूं की कीमतों को नियंत्रण करने की कोशिश कर रही है. बता दें कि गेहूं और चावल के औसत खुदरा मूल्य जुलाई में बढ़कर 29.59 रुपये प्रति किलोग्राम और 40.82 रुपये प्रति किलोग्राम हो गये है.
खाद्य संचिव संजीव चोपड़ा का कहना है कि सरकार की गेहूं की कीमतों पर नजर है लेकिन अब तक इंपोर्ट पर फैसला नहीं लिया गया है. उन्होंने कहा, सरकार के स्तर पर इंपोर्ट का इरादा नहीं है. खाने के तेल की कीमतें अभी बढ़ने की संभावना नहीं है.
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि गेहूं और चावल के खुदरा मूल्य लगातार बदल रहे हैं और सरकार इनकी कीमत पर नजर रख रही है. उन्होंने बताया कि जनवरी में गेहूं का औसत खुदरा मूल्य 31.58 रुपये प्रति किलोग्राम था जो मई में घटकर 28.74 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया था. इसके बाद गेहूं का औसत खुदरा मूल्य जुलाई में एक बार फिर बढ़कर 29.59 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया.
ज्योति ने कहा कि इसी तरह चावल का औसत खुदरा मूल्य भी जनवरी में 38.09 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर जुलाई में 40.82 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया. सरकार ने आवश्यक खाद्य वस्तुओं की घरेलू उपलब्धता को मजबूत करने और मूल्यों को स्थिर करने के लिए समय-समय पर अनेक कदम उठाये हैं.
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