मशरूम की खेती ने संगीता को दी नई जिंदगी, अब हर महीने कर रहीं ₹40 हजार तक कमाई, जानिए सफलता की कहानी

Mushroom Farming: संगीता के जीवन में एक दौर वह भी था, जब आर्थिक तंगी से जूझ रहीं थीं. तभी उन्हें मशरूम की खेती के बारे में पता चला. शुरुआत में लोग मजाक उड़ाते थे. इसे गोरबछत्ता कहते थे. मगर संगीता ने हार नहीं मानी. गावं की महिलाओं को इसके फायदे बताए. 
मशरूम की खेती ने संगीता को दी नई जिंदगी, अब हर महीने कर रहीं ₹40 हजार तक कमाई, जानिए सफलता की कहानी

Mushroom Farming: मशरूम की खेती ने खोला समृद्धि का द्वार. बिहार के लालगंज के रामपुर बखरा की संगीता कुमारी ने बदहाली से खुशहाली का रास्ता मशरूम के सहारे तय किया. उन्होंने न सिर्फ मशरूम (Mushroom) उगाना सीखा बल्कि उससे नए प्रोडक्ट भी बनाए. इससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हुई. आपको बता दें कि मशरूम में ज्यादा मात्रा में प्रोटीन और पोषक तत्व मौजूद होते हैं. बाजार में इसकी मांग काफी ज्यादा है. इसलिए, मशरूम की खेती से रोजगार के साथ कमाई का अवसर मिलता है.

मशरूम की खेती आर्थिक तंगी से उबारा

केवीके हरिहरपुर में बतौर मास्टर ट्रेनर काम कर रहीं संगीता के जीवन में एक दौर वह भी था, जब आर्थिक तंगी से जूझ रहीं थीं. तभी उन्हें मशरूम की खेती के बारे में पता चला. शुरुआत में लोग मजाक उड़ाते थे. इसे गोरबछत्ता कहते थे. मगर संगीता ने हार नहीं मानी. गावं की महिलाओं को इसके फायदे बताए.

बिहार सरकार, कृषि विभाग के मुताबिक, हाल ही में सोनपुर मेले में संगीता के बनाए उत्पाद सराहे गए. चॉकलेट, बिस्किट, अचार, बड़ी, सूप आदि की करीब 2 लाख रुपये की बिक्री हुई. इसमें मशरूम से बने चॉकलेट ही 80,000 रुपये के बिके.

Mushroom Farming

हर महीने 40 हजार रुपये तक हो जाती है कमाई

वर्ष 2016 में इन्होंने मशरूम से अच्छे पैसे कमाए. संगीता शुरू में घर में ही ऑयस्टर मशरूम उगा रही थीं. बाद में इसका विस्तार किया. उन्होंने अपने मशरूम को 'लिच्छवी मशरूम' नाम दिया. अपनी दोनों बेटियों को भी इससे जोड़ा. संगीता मशरूम के उत्पाद से 35 से 40 हजार रुपये महीने में कमा लेती हैं. इन्होंने सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) बनाया है. जिसमें 40 महिलाएं हैं. मशरूम महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है.

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