बिहार के किसानों के लिए अच्छी खबर है. बिहार सरकार ने हरी खाद योजना (Green Manure Scheme) एक बार फिर से शुरू की है. राज्य सरकार ने हरी खाद यानी मूंग और ढैंचा की खेती के लिए सब्सिडी रकम जारी कर दी है. इस योजना के तहत किसानों को मूंग बीज पर 80% और ढैंचा पर 90% सब्सिडी दी जाएगी. (Image- Freepik)
1/5हालांकि, देरी हो जाने की वजह से मूंग के बीज का वितरण फरवरी 2024 में किया जाएगा. अभी ढैंचा के बीज का वितरण किया जाएगा. गरमा मौसम में मूंग की 10 हजार हेक्टेयर और ढैंचा की 28 हजार हेक्टेयर में खेती कराई जाएगी. (Image- Freepik)
2/5मूंग और ढैंचा की खेती कर खेत की मिट्टी में जीवाश्म और कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ाना है. गरमा फसल के लिए बिहार राज्य बीज निगम द्वारा अनुदान दिया जाएगा. सभी जिले के लिए लक्ष्य तय कर दिए गए हैं. आवेदन के बाद किसानों को प्रखंड या जिलास्तर पर निगम के डीलर नेटवर्क और अन्य खेतों से बीज उपलब्ध कराया जाएगा. (Image- Freepik)
3/5ढैंचा बीच पर सब्सिडी के लिए आवेदन शुरू हैं. ढैंचा के लिए 12 मई तक आवेदन किए जाएंगे. 22 मई तक बीज वितरण किया जाएगा. (Image- Freepik)
4/5जैविक कोरिडोर के चयनित किसानों और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने वाले किसानों को योजना में प्राथमिकता दी जाएगी. इसके अलावा छोटे किसानों को प्राथमिकता देते हुए 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज वितरण किया जाएगा. (Image- Freepik)
5/5ढैंचा एक हरी खाद वाली फसल (Dhaincha Green Manure) है, जिसका इस्तेमाल खेतों के लिये हरी खाद बनाने में किया जाता है. ढैंचा के पौधे बढ़ने पर इसकी कटाई करके हरी खाद बना सकते हैं, जिसके बाद ये दोबारा बढ़ती. इसके इस्तेमाल के बाद खेत में अलग से यूरिया की जरूरत नहीं पड़ती है. ढैंचा फसल को हरी खाद के रूप में लेने से मिट्टी के स्वास्थ्य में जैविक, रासायनिक और भौतिक सुधार होते हैं और जलधारण क्षमता बढ़ती है. ढैंचा की पलटाई कर खेत में सड़ाने से नाइट्रोजन, पोटाश, गंधक, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जस्ता, तांबा, लोहा जैसे तमाम प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं. (Image- Freepik)