Marcha Dhan GI tag: पश्चिम चंपारण जिले के आधा दर्जन प्रखंडों में उत्पादित होने वाले मर्चा धान को जीआई टैग मिला है. अब चंपारण के मर्चा धान, चूड़ा व चावल की खुशबू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिखेरेगी. जीआई रजिस्ट्रार चेन्नई की ओर से इसका सर्टिफिकेट जारी किया गया है. (Image- Freepik)
1/4इसकी औसत उपज 20-25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है. इस धान के लम्बे पौधे 145-150 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. चंपारण की शान मर्चा धान से विश्व स्तर पर इस जिले की पहचान मिली है. मर्चा धान, चावल, चूड़ा अपने स्वाद, खुशबू और पोषक तत्वों के कारण प्रसिद्ध हैं. (Image- Freepik)
2/4पूरे बिहार में छठे उत्पादन को जीआई टैग मिला है. इससे पहले, भागलपुर के कतरनी चावल, भागलपुर का जर्दालु आम, नवादा का मगही पान, मुजफ्फरपुर की शाही लीची और मिथिला के मखाना को जीआई टैग मिल चुका है. बिहार में चंपारण का यह छठा उत्पादन है जिसे जीआई टैग मिला है.
3/4GI Tag यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग ये एक प्रकार का लेबल होता है, जिसमें किसी प्रोडक्ट को विशेष भौगोलिक पहचान दी जाती है. ऐसा प्रोडक्ट जिसकी विशेषता या फिर नाम खास तौर से प्रकृति और मानवीय कारकों पर निर्भर करती है. जीआई टैग के जरिए उत्पादों को कानूनी संरक्षण मिलता है. साथ ही जीआई टैग किसी उत्पाद की अच्छी गुणवत्ता का पैमाना भी होता है जिससे देश के साथ-साथ विदेशों में भी उस उत्पाद के लिए बाजार आसानी से मिल जाता है. (Image- Freepik)
4/4इससे मर्चा धान की खेती में लगे किसानों को उनके उत्पादनों के लिए ज्यादा कीमत मिलेगी. साथ ही आधारित कई उद्योग भी लगेंगे. (Image- Freepik)