Gram Cultivation: चना रबी सीजन में उगायी जाने वाली प्रमुख दलहनी फसल है. चने की अच्छी पैदावार लेने के लिए समय-समय पर कृषि काम करना जरूरी है. रोगमुक्त और स्वस्थ पैदावार के लिए हरियाणा सरकार ने चना की खेती (Chana ki Kheti) करने वाले किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. राज्य सरकार द्वारा जारी इन सुझावों को फॉलो कर किसान चना का बंपर उत्पादन ले सकते हैं.
चने की अच्छी पैदावार के लिए जरूरी काम
- फूल आने से पहले जरूरत के अनुसार पानी दें.
- सर्दियों में बारिश न हो तो चने की फसल की शीर्ष शाखाएं तोड़ना बहुत जरूरी काम है. 15-20 सेमी की ऊंचाई होती ही शाखाएं तोड़ लें. इससे इसकी वृद्धि रूक जाती है और शाखाएं अधिक फूटती हैं. इससे प्रति पौधा फूलों व पत्तियों की संख्या बढ़ जाती है जिससे उपज बढ़ जाती है.
- कटुआ सूंडी के नियंत्रण के लिए 50 मिली साईपर मैथरिन 25 ई.सी. को 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़कें अथवा 10 किलोग्राम 0.4% फैनवालरेट धूड़ा प्रति एकड़ के हिसाब से धूड़ें.
- फली छेदक सूंडी के नियंत्रण के लिए 200 मिली मोनोक्रोटोफॉस 36 एस.एल का 100 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ छिड़काव उस समय करें जब एक सूंडी प्रति एक मीटर लाइन पौधों पर मिलने लगे, पौधों पर 50% टांट पड़ गए हों.
- फसल की कटाई फलियों के परिपक्व होने पर और पौधे सूखने शुरू हो जाए तब करनी चाहिए. दलहनी फसलों की कटाई जमीन की सतह से 4-5 सेमी ऊपर हसिया से करनी चाहिए.
चने की उपज बढ़ाने के तरीके
- रोग मुक्त खेत में अनुसंशित किस्मों को उगाना चाहिए.
- बीजों को राइजोबियम कल्चर से बुवाई से पहले उपचारित करना चाहिए.
- उर्वरकों को इस्तेमाल पोरा द्वारा और बीज की बीजाई केरा द्वारा करना चाहिए.
- फली छेदक का सही प्रबंधन होना चाहिए.
- खेत खरपतवार से मुक्त होना चाहिए, साथ ही समेकित खरपतवार प्रबंधन की व्यवस्था करनी चाहिए.