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अशनीर ग्रोवर के खिलाफ BharatPe ने केस किया है. (Image: Twitter/@AshneerGrover)
BharatPe-Ashneer Grover Controversy: फिनटेक कंपनी भारतपे (BharatPe) ने अपने पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर के पास मौजूद हिस्सेदारी और संस्थापक के दर्जे को वापस लेने के लिए मध्यस्थता अर्जी लगाई है. ये शेयर अभी प्रतिबंधित श्रेणी में हैं. घटनाक्रम से परिचित सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि एक दिन पहले सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (CIAC) के नियमों के तहत यह मध्यस्थता अर्जी दायर की गई है. अगर भारतपे की यह अर्जी मंजूर कर ली जाती है तो ग्रोवर अपने पास मौजूद कंपनी के निषिद्ध शेयर और संस्थापक का दर्जा दोनों गंवा सकते हैं.
भारतपे में करीब 8.5 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रोवर के पास है लेकिन इसमें से 1.4 प्रतिशत शेयरधारिता प्रतिबंधित श्रेणी में हैं. प्रतिबंधित शेयरधारिता का मतलब है कि कंपनी के कर्मचारी के तौर पर मिली उस हिस्सेदारी को ट्रांसफर नहीं जा सकता है. सूत्रों ने कहा कि भारतपे की तरफ से ग्रोवर को पहले एक कानूनी नोटिस भेजकर इन शेयर वापस करने को कहा गया था. शेयरधारक के साथ हुए समझौते के तहत प्रतिबंधित शेयरों को वापस लेने का भी प्रावधान होता है. हालांकि, इस मध्यस्थता आवेदन के बारे में कंपनी की तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
भारतपे ने साल की शुरुआत में ग्रोवर पर कोष की धांधली और धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे. उसके बाद ग्रोवर और उनकी पत्नी माधुरी जैन कंपनी से अलग हो गए थे. लेकिन दोनों पक्षों के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा. इसी क्रम में भारतपे ने हाल ही में ग्रोवर दंपती और उनके तीन रिश्तेदारों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में दीवानी मुकदमा दर्ज कराने के अलावा आर्थिक अपराध शाखा के पास आपराधिक शिकायत भी दर्ज कराई है. कंपनी ने उनसे हर्जाने के तौर पर 88.67 करोड़ रुपये की मांग की है.
भारतपे के कामकाज की समीक्षा में प्रतिकूल रिपोर्ट आने के बाद पिछले मार्च में ग्रोवर ने इस्तीफा दे दिया था जबकि उनकी पत्नी को कंपनी से निकाल दिया गया था.
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