RBI आज ले सकता है बड़ा फैसला, दरों में हो सकती है 0.35 फीसदी तक की कटौती

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आज अपनी क्रेडिट पॉलिसी पेश करेगा. उम्मीद की जा रही है कि इस पॉलिसी से बैंकों के साथ आम आदमी को भी बड़ी राहत मिल सकती है.
RBI आज ले सकता है बड़ा फैसला, दरों में हो सकती है 0.35 फीसदी तक की कटौती

अगर रेट कट होता है तो यह लगातार तीसरा मौका होगा जब ब्याज दरें घटाई जाएंगी. (फोटो: PTI)

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आज अपनी क्रेडिट पॉलिसी पेश करेगा. उम्मीद की जा रही है कि इस पॉलिसी से बैंकों के साथ आम आदमी को भी बड़ी राहत मिल सकती है. जानकारों की मानें तो RBI की बैठक में 0.25 फीसदी ब्याज दरें कम करने पर फैसला हो सकता है. अगर आरबीआई रेपो रेट में कटौती करता है तो यह लगातार तीसरा मौका होगा जब ब्याज दरें घटाई जाएंगी.

इकोनॉमिस्ट और बैंकर्स का मानना है कि आरबीआई के पास दरें घटाने का अच्छा स्कोप है. महंगाई दर RBI के अनुमान से नीचे है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी गिरावट है. देश की आर्थिक ग्रोथ को पटरी पर लाने के लिए ब्याज दरें घटाना बेहद जरूरी है.

कम होगी आपकी ईएमआई
ब्याज दरें घटाने का मतलब है कि अब बैंक जब भी आरबीआई से कर्ज लेंगे तो उन्हें नई दर पर फंड मिलेगा. सस्ती दर पर मिलने वाले कर्ज का फायदा बैंक अपने ग्राहकों को भी देंगे. इससे आपका कर्ज सस्ता हो जाएगा और ईएमआई घट जाएगी. आपको बता दें जब भी रेपो रेट घटता है तो आपके लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है. साथ ही जो कर्ज फ्लोटिंग हो तो EMI भी घट जाती है.

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परंपरागत स्तर से ज्यादा घट सकती हैं दरें
अमेरिका की रिसर्च फर्म बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच की जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI इस बार परंपरागत स्तर से ज्यादा कटौती कर सकता है. ब्याज दरों में 0.35 प्रतिशत की गैर-परंपरागत स्तर की कटौती की जा सकती है. बोफाएमएल की रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई संतोषजनक स्तर पर है, जिस वजह से परंपरागत स्तर से हटकर ब्याज दरों में कुछ अधिक कटौती की जा सकती है.

क्यों कम होंगी ब्याज दरें
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती करेगा. देश की आर्थिक ग्रोथ की चिंता में RBI यह फैसला ले सकता है. मार्च तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर 5.8 फीसदी पर आ गई है जो इसका पांच साल का निचला स्तर है.

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