अगर आपके पास एसबीआई (SBI) का सामान्य सेविंग अकाउंट (saving account) हैं तो आप इसे सैलरी अकाउंट (salary account) भी बनवा सकते हैं. देश का सबसे बड़ा बैंक यह खास सुविधा नौकरी करने वालों को देता है. इस अकाउंट के लिए सैलरी पाने वाला केंद्र सरकार, राज्य सरकार, रक्षा बलों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस बलों, कॉरपोरेट्स/संस्थानों का कर्मचारी होना चाहिए. यह एक जीरो बैलेंस अकाउंट है यानी इस खाते में वेतनभोगी को औसत न्यूनतम मासिक बैलेंस बनाए रखने की जरूरत नहीं होती. एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, कस्टमर्स को सैलरी अकाउंट के साथ एटीएम-सह डेबिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग जैसी कई सुविधाएं मिलती हैं.
1/5एसबीआई के साथ एक सैलरी अकाउंट खोलने के लिए, एलिजिबल कर्मचारी को दो पासपोर्ट साइज फोटो, आईडी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ, नौकरी का प्रूफ और नई सैलरी स्लिप होनी चाहिए. ज्वाइंट अकाउंट के लिए, दोनों कस्टमर को आईडी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ देना जरूरी होता है. कर्मचारी की महीने की कुल सैलरी या पद के लेवल के आधार पर अलग-अलग डेबिट कार्ड (Debit Card) उपलब्ध हैं.
2/5सभी सैलरी पैकेज कस्टमर्स को एटीएम-सह डेबिट कार्ड बिल्कुल फ्री में जारी किए जाते हैं. सालाना मेंटेनेंस फीस भी माफ कर दिया जाता है. एटीएम-सह-डेबिट कार्ड जारी करना सैलरी अकाउंट के प्रकार पर निर्भर करता है.
3/5सैलरी अकाउंट वाले कर्मचारी को इसके बदले सप्लीमेंटरी पर्सनल दुर्घटना बीमा (PAI) और एयर एक्सीडेंटल इंश्योरेंस (AAI) कवर भी प्रदान किए जाते हैं. अधिकतम कवरेज राशि सैलरी पैकेज अकाउंट के प्रकार और पर निर्भर करती है.
4/5अगर लगातार तीन महीनों से अधिक समय तक अकाउंट में पैसा जमा नहीं किया जाता है तो सैलरी अकाउंट से जुड़ी विशेष सुविधाएं वापस ले ली जाती हैं और अकाउंट सामान्य सेविंग अकाउंट के रूप में माना जाता है.
5/5एसबीआई की इस सैलरी अकाउंट सुविधा के साथ नेशनल पेंशन प्रणाली (NPS) और सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. अगर कर्मचारी नौकरी बदल लेता है तब भी वह एसबीआई के सैलरी अकाउंट से पैसा निकालना जारी रख सकता है. ऐसे मामले में, उसे बैंक डिटेल के बारे में मौजूदा नियोक्ता को सूचित करना चाहिए, ताकि सैलरी उसी खाते में क्रेडिट हो सके. वेतन भोगी को नौकरी बदलने की सूचना बैंक शाखा को भी देनी होगी. (रॉयटर्स, पीटीआई, जी बिजनेस)