भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने सरकारी और प्राइवेट बैंकों (public and private sector banks) के प्रमुखों के साथ बैठक की. इस बैठक में कोविड-19 संकट के बीच आर्थिक स्थिति और वित्तीय प्रणाली (financial system) के दबाव को कम करने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए कदमों के असर की समीक्षा की गई. यह बैठक दो सत्रों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई. बैठक में आरबीआई गवर्नर ने लॉकडाउन के दौरान लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में बैंकों के प्रयास की तारीफ की.
1/5रिजर्व बैंक ने बैठक के बाद जारी बयान में कहा कि इसमें प्रमुख सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शामिल हुए. बैठक के दौरान अन्य बातों के अलावा मौजूदा आर्थिक स्थिति (current economic situation) और वित्तीय क्षेत्र (financial sector) की स्थिरता पर चर्चा की गई.
2/5इसके साथ ही बैठक में अर्थव्यवस्था के अलग अलग क्षेत्रों में लोन की उपलब्धता सहित गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिए पैसे की उपलब्धता , सूक्ष्म वित्त संस्थानों, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों, म्यूचुअल फंड आदि को नकदी की स्थिति पर चर्चा हुई. साथ ही बैठक में लॉकडाउन के बाद लोन दिए जाने, वर्किंग कैपटल और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (MSME) को लोन उपलब्ध कराने पर चर्चा की गई .
3/5रिजर्व बैंक ने कोविड-19 की वजह से कर्ज की मासिक किस्त (EMI) के भुगतान पर तीन माह की 'रोक लगाई है. बैठक में इसकी भी समीक्षा की गई. आरबीआई की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती के मद्देनजर बैंकों की विदेशों में स्थित शाखाओं की निगरानी पर भी विचार-विमर्श हुआ.
4/5रिजर्व बैंक ने कर्ज लेने वाले ग्राहकों, लोन देने वाली संस्थाओं और म्यूचुअल फंडों सहित अन्य इकाइयों पर दबाव कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं. फरवरी, 2020 से रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3.2 प्रतिशत के बराबर नकद धन डाल चुका है. रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में 0.75 प्रतिशत की कटौती कर इसे 11 साल के निचले स्तर 4.4 प्रतिशत पर ला दिया है. अब केंद्रीय बैंक द्वारा बैंकों पर भी कर्ज पर ब्याज की दर कम करने का दबाव बनाया जा रहा है.
5/5इसके अलावा रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो दर को भी घटाकर 3.75 प्रतिशत कर दिया है. इससे बैंक अधिक कर्ज देने के लिए प्रोत्साहित होंगे. आशंका जताई जा रही है कि कोविड-19 की वजह से आर्थिक गतिविधियां ठप रहने के चलते अप्रैल-जून की तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर में भारी गिरावट की जा सकती है.