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कब कराना चाहिए लोन रीफाइनेंसिंग, कर्जदारों को कैसे मिलता है इसका फायदा?
RBI ने हाल ही में छठवीं बार रेपो रेट बढ़ाया है. जब भी रेपो रेट बढ़ाया जाता है, तो लोन का ब्याज भी बढ़ता है क्योंकि रेपो रेट वो दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को ब्याज देता है. जब बैंकों को लोन महंगी दरों पर मिलता है तो बैंक भी अपने ग्राहकों को महंगी दरों पर ही लोन देते हैं. इससे कई बार आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ता है और व्यक्ति का बजट गड़बड़ा जाता है. ऐसे में लोन रीफाइनेंसिंग का विकल्प आपके लिए काफी मददगार हो सकता है. यहां जानिए क्या होता है रीफाइनेंसिंग.
होम लोन रीफाइनेंसिंग में कम ब्याज दर जैसी शर्तों वाला नया लोन लिया जाता है और पुराने लोन को क्लोज करा दिया जाता है. इसके बाद नए लोन का पुनर्भुगतान शुरू कर दिया जाता है. नया लोन आप मौजूदा या नए बैंक से ले सकते हैं.
नया लोन आप कम ब्याज दरों के साथ लेते हैं, ऐसे में आपकी ईएमआई का बोझ अपने आप ही कम हो जाता है. इसके अलावा आप चाहें तो नए लोन में छोटी लोन अवधि का भी फायदा ले सकते हैं. यानी नया लोन लेते समय आप लोन चुकाने की अवधि कम करवा सकते हैं. इससे आप अपने होम लोन को समय से पहले चुका सकते हैं.