पर्सनल लोन (Personal Loan), ऑटो लोन (Auto Loan) और होम लोन (Home Loan) जैसे तमाम लोन की जरूरत कभी ना कभी हर किसी को तो पड़ती ही है. हालांकि, लोग अक्सर बैंकों से लोन लेते वक्त कुछ बातों का ध्यान नहीं देते और बात में उन्हें दिक्कत होती है. बता दें कि यह ऐसी बातें हैं, जिन पर आप चाह कर भी ध्यान नहीं दे पाते हैं, क्योंकि तमाम बैंकों ने इसे अपनी प्रैक्टिस बनाया हुआ है. यही वजह है कि कुछ वक्त पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और एनबीएफसी को फटकार भी लगाई थी. आरबीआई ने कहा था कि उनके खिलाफ कई शिकायतें आ रही हैं और ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें लोगों को दिए गए लोन पर तय सीमा से अधिक ब्याज वसूला गया है. आइए जानते हैं इन गलत प्रैक्टिस के बारे में.
1/10कई बैंक अपने ग्राहकों से उनके देने वाले लोन पर उसके अप्रूवल की तारीख से ब्याज लगा रहे थे. बैंकों को उस दिन से ब्याज लगाना चाहिए, जब लोन की रकम लोगों के खाते में पहुंच जाए.
2/10कुछ ऐसा ही चेक के जरिए लोन दिए जाने के मामले में भी देखने को मिला. यह पाया गया कि बैंक चेक की तारीख से ब्याज लगा रहे थे, जबकि चेक कई दिनों बाद ग्राहकों को सौंपा गया और चेक सौंपने की तारीख से ही ब्याज वसूलना चाहिए.
3/10किसी महीने के दौरान लोन देने या रीपेमेंट के मामले में कुछ बैंक पूरे महीने के लिए ब्याज दर वसूल रहे थे. ऐसे मामले में बैंकों को करना ये चाहिए कि उन्हें महीने के सिर्फ उतने दिनों का ब्याज लेना चाहिए, जितने दिन के लिए लोन बकाया है, ना कि पूरे महीने का ब्याज वसूलना चाहिए.
4/10कुछ मामलों में, यह भी देखा गया कि बैंक एक या अधिक किस्तें पहले ही वसूल कर रहे थे, लेकिन लोन की पूरी रकम पर ब्याज कैल्कुलेट कर रहे थे. ये सब देखकर आरबीआई ने कहा कि ब्याज वसूलने की ऐसी गैर-मानक प्रथाएं, जो ग्राहकों के साथ व्यवहार करते समय निष्पक्षता और पारदर्शिता की भावना के अनुरूप नहीं हैं, "गंभीर चिंता" का कारण है.
5/10पर्सनल लोन (Personal Loan) लेते वक्त आपको कुछ फीस (Personal Loan Fees) और चार्ज (Personal Loan Charge) के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है. इन शुल्कों को समझना आपके लिए फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) को आसान बना सकता है और आपको अप्रत्याशित खर्चों से बचने में मदद कर सकता है. यहाँ कुछ खास फीस और चार्ज हैं जो पर्सनल लोन लेते समय ध्यान में रखना चाहिए.
6/10यह फीस लोन की प्रोसेसिंग के दौरान बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा लिया जाता है. यह आमतौर पर लोन का 1% होता है, जो 3% तक हो सकती है और कभी-कभी यह राशि न्यूनतम सीमा में भी हो सकती है.
7/10अगर आप लोन की राशि पहले चुका देते हैं यानी पहले से निर्धारित अवधि से पहले, तो कुछ संस्थाएं इसके लिए शुल्क लेती हैं. यह शुल्क आमतौर पर लोन के बैलेंस का 2% से 5% तक हो सकता है. कुछ बैंकों में यह शुल्क पूरी तरह से लागू नहीं होता, खासकर अगर आपने लोन का कुछ हिस्सा चुका दिया हो.
8/10अगर आप अपनी ईएमआई (EMI) को समय पर नहीं चुकाते हैं, तो बैंक या लेंडर लेट फीस लगा सकते हैं. यह शुल्क बैंक द्वारा तय किया जाता है और यह आपकी ईएमआई के आधार पर अलग-अलसग हो सकता है. यह शुल्क आमतौर पर ₹500 से ₹2000 के बीच हो सकता है.
9/10अगर आप लोन की ईएमआई चेक के माध्यम से चुका रहे हैं और चेक बाउंस हो जाता है, तो बैंक आपको बाउंस फीस लगा सकता है. यह शुल्क ₹200 से ₹500 तक हो सकता है. यह भी आपके बैंक पर निर्भर करता है, हो सकता है कि आप पर और ज्यादा चार्ज लगे.
10/10कुछ बैंकों द्वारा पर्सनल लोन पर बीमा पॉलिसी लेने के लिए शुल्क लिया जाता है. इसका उद्देश्य लोन की राशि को जोखिम से बचाना है. यह शुल्क लोन राशि और बीमा पॉलिसी पर निर्भर करता है.