&format=webp&quality=medium)
प्राइवेट बैंकों की पेनाल्टी वसूली का आंकड़ा लगातार बढ़ा है. (फोटो: PTI)
बड़े-बड़े कॉरपोरेट देनदारों से बैंक भले ही पैसे न वसूल पाएं या फिर भारी भरकम हेयर कट लेकर लोन सेटलमेंट करें. लेकिन, आम ग्राहकों से कमाई में कसर नहीं छोड़ते. निजी बैंक इस मामले में सबसे आगे हैं. खाते में मिनिमम बैलेंस न होने पर बीते तीन बरसों में 4 बड़े निजी और 18 सरकारी बैंकों ने ग्राहकों से कुल मिलाकर 9721 करोड़ रुपए की पेनाल्टी वसूली है. बीते तीन साल में चार बड़े निजी बैकों ने करीब 3566 करोड़ रुपए बतौर पेनाल्टी वसूला. जबकि 18 सरकारी बैंकों ने 6155 करोड़ रुपए की वसूली की.
प्राइवेट बैंकों में बढ़ रहा है पेनाल्टी का आंकड़ा
प्राइवेट बैंकों की पेनाल्टी वसूली का आंकड़ा लगातार बढ़ा है. जबकि सरकारी बैंकों की ओर से पेनाल्टी वसूली की रकम 2017 से घटी है. इसकी वजह ये रही है कि SBI ने भारी विरोध के बाद मिनिमम बैलेंस की सीमा की समीक्षा की थी. ये जानकारी राज्य सभा में वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर की ओर से लिखित जवाब के तौर पर मंगलवार को दी गई है. दरअसल, बैंकों को ये छूट है कि वो अपने बोर्ड की ओर से तय पॉलिसी के तहत सेवाओं के बदले पैसे चार्ज करें.
क्या है आरबीआई का नियम?
रिजर्व बैंक सर्विस देने के बदले चार्ज की ज्यादातर मामलों में समीक्षा नहीं करता है. लेकिन, रिजर्व बैंक ये जरूर तय करता है कि बैंक सर्विस के बदले वाजिब रेट चार्ज करें. RBI का नियम है कि बैंक बेसिक सेविंग बेसिक डिपॉजिट (BSBD) वाले खातों पर कोई मिनिमम बैलेंस चार्ज न लगाए. ऐसे खातों को जीरो बैलेंस खाता भी कहते हैं. ऐसे खातों में प्रधानमंत्री जनधन वाले खाते भी शामिल होते हैं. ऐसे खातों के ATM कार्ड पर सालाना कोई फीस भी नहीं होती है. महीने में केवल चार बार ही ट्रांजेक्शन की छूट होती है. हालांकि, एक व्यक्ति सभी बैंकों को मिलाकर केवल एक ही जीरो बैलेंस खाता खोल सकता है. बैंक अगर चाहें तो अन्य सुविधाएं भी मुफ्त दे सकते हैं.
मिनिमम बैलेंस से छूट वाले खाते