चीन को तगड़ा झटका, ग्रोथ रेट 3 दशकों में सबसे नीचे पहुंची

अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध का असर दिखने लगा है. पिछले एक साल से छिड़ा यह ट्रेड वॉर अब दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ने लगा है. खासकर चीन की विकास दर लगातार पिछड़ रही है.
चीन को तगड़ा झटका, ग्रोथ रेट 3 दशकों में सबसे नीचे पहुंची

NBS (नेशनल ब्यूरो स्टेटिक्स) की रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तिमाही में चीन की विकास दर गिरकर 6.2 फीसदी पर आ गई है.

अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध का असर दिखने लगा है. पिछले एक साल से छिड़ा यह ट्रेड वॉर अब दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ने लगा है. खासकर चीन की विकास दर लगातार पिछड़ रही है.

चीन ने हाल ही में वित्त वर्ष 2019-20 के दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए इकोनॉमिक रिपोर्ट जारी की है. NBS (नेशनल ब्यूरो स्टेटिक्स) की रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तिमाही में चीन की विकास दर गिरकर 6.2 फीसदी पर आ गई है. पहली तिमाही में विकास दर 6.4 फीसदी थी. तिमाही विकास दर में यह पिछले तीन दशकों में सबसे कम है.

1992 की पहली तिमाही के बाद देश की विकास दर सबसे न्यूनतम पर पहुंच गई है. बता दें, चीन में कैलेंडर ईयर ही फाइनेंशियल ईयर होता है. यहां का वित्त वर्ष 1 जनवरी से शुरू होकर 31 दिसंबर तक होता है.

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चीन का अब तक का अनुमान था कि चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था 6.4 फीसदी की रफ्तार से विकास करेगी. लेकिन, दूसरे क्वार्टर की रिपोर्ट निराशाजनक हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के हालिया फैसलों की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था पर से निवेशकों का विश्वास कम हुआ है. ट्रंप ने चीन से आयात होनेवाले 250 अरब डॉलर के सामान पर टैक्स बढ़ा दिया है जिसकी वजह से चीन का निर्यात काफी हद तक प्रभावित हुआ है.

चीन सरकार की तरफ से बयान जारी कर कहा गया कि जून महीने में निर्यात 1.3 फीसदी घट गया है, जबकि आयात 7.3 फीसदी घटा है. ट्रेड वॉर की वजह से चीन में स्थापित सैकड़ों मल्टी नेशनल कंपनी दूसरे देशों में अपने लिए जगह की तलाश में लग गई है. निवेशकों का विश्वास घट गया है. इन तमाम वजहों से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है.

हालात सुधरने की उम्मीद
चीन के आर्थिक जानकारों का कहना है कि फिलहाल ट्रेड वॉर का बहुत ज्यादा असर विदेशी निवेशकों पर नहीं पड़ा है. अभी भी चीन में विकास की सैकड़ों प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं. हाई स्पीड रेल लाइन बिछाई जा रही है. सुदूर इलाकों में भी सड़कें बनाई जा रही हैं. कुछ बैंकरों का यह भी मानना है कि शायद इतने बड़े निवेश का बहुत अच्छा रिटर्न नहीं मिलेगा. आने वाले दिनों में यह सरकार और बैंकों के लिए बहुत बड़ी समस्या हो सकती है.