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हर साल 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस (World Blood Donor Day) मनाया जाता है. माना जाता है कि साल 1868 में आज ही के दिन मशहूर इम्यूनोलॉजिस्ट कार्ल लैंडस्टीनर का जन्म हुआ था. कार्ल लैंडस्टीनर ने ही ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज की थी, जिसके बाद इंसानों में अलग-अलग ब्लड ग्रुप का पता चला. इस खोल के बाद ही एक इंसान से दूसरे इंसान में रक्तदान संभव हो सका. रक्तदान को महादान माना गया है क्योंकि ये किसी को नई जिंदगी देता है.
हर साल कार्ल लैंडस्टीनर के जन्मदिन के मौके पर रक्तदान दिवस मनाकर लोगों को रक्तदान के फायदे बताए जाते हैं और इससे जुड़ी गलतफहमियों को दूर करके इस नेक काम के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. आइए आपको बताते हैं कि रक्तदान किसको करना चाहिए और किसको नहीं! इस मामले में क्या कहती है WHO की गाइडलाइन-
रक्तदान सिर्फ एक अच्छा काम ही नहीं है, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है. रक्तदान करने से शरीर तमाम बीमारियों से बचा रहता है और दिमाग एक्टिव होता है. आपका ब्लड पतला रहता है, जिससे दिल की सेहत यानी हार्ट में भी सुधार होता है. वेट कंट्रोल में रहता है और कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है. इसके अलावा आप अच्छा महसूस करते हैं, ऐसे में आपके इमोशनल हेल्थ में भी ये सुधार करता है.
पुरुष हर 3 महीने के बाद और महिलाएं 4 महीने के बाद रक्तदान कर सकती हैं. दरअसल शरीर में मौजूद रेड ब्लड सेल्स 3 से 4 महीने बाद नष्ट हो जाती हैं, ऐसे में इतने अंतराल पर रक्त दान करने की सलाह दी जाती है. रक्तदान करते समय शरीर से एक यूनिट यानी 350 मिलीग्राम खून लिया जाता है.